दीपक मिश्रा
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज ने सम्पूर्ण संत समाज से यूजीसी एक्ट का विरोध करने की अपील की*
हरिद्वार
( गोपाल रावत)
शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर व श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज आज अपने वर्ल्ड रिलिजियस कन्वेंशन की मुख्य संयोजक डॉ उदिता त्यागी और अपने शिष्य यति रणसिंहानंद जी,यति अभयानंद जी,यति धर्मानंद जी,मोहित बजरंगी और डॉ योगेन्द्र योगी के साथ हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर यूजीसी एक्ट जैसे महाविनाशकारी षडयंत्र पर संत समाज के मौन के विरोध में एक दिन का सांकेतिक उपवास करने हरिद्वार आ रहे थे परंतु उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें उत्तर प्रदेश उत्तराखंड बोर्डर पर ही रोक दिया।
श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज ने इसे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार देते हुए इसका कड़ा विरोध किया परन्तु भारी पुलिस बल के सामने उनकी और उनके शिष्य मंडली की एक ना चली।
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज का कहना है कि यूजीसी एक्ट अरब देशों विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात की योजनाओं का हिस्सा है।आज वैश्विक इस्लामिक थिंक टैंक का मानना है कि जब तक भारत से ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्य डी एन ए को नहीं बदला जाएगा तब तक भारत का पूर्ण इस्लामीकरण संभव नहीं है।भारत के इस्लामीकरण के बिना पूरी दुनिया के इस्लामीकरण का लक्ष्य कभी भी पूरा नहीं हो सकता।इतने दमन और अत्याचारों के बाद भी ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य समाज सनातन धर्म की ढाल बन कर खड़े थे।अगर यह ढाल हट जाए तो भारत के इस्लामीकरण को कोई नहीं रोक सकता।इसीलिए उन्होंने भारत के मौलानाओं के माध्यम से आर एस एस के नेताओं को अपनी पकड़ में लेकर ये यूजीसी एक्ट लागू करवाया है।वास्तव में यह यूजीसी एक्ट हिन्दू समाज का डेथ वारंट है।
उत्तर प्रदेश उत्तराखंड बोर्डर से ही महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज ने संत समाज से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि इस षड्यंत्र पर संत समाज का मौन सनातन धर्म के महाविनाश का संकेत है।इतने बड़े षड्यंत्र पर सनातन का संत समाज मौन कैसे रह सकता है?यह षड्यंत्र समूचे हिंदू समाज को जातीय युद्ध की ज्वाला में झोंक देगा।अब भी अगर संत समाज मौन रह गया तो सनातन धर्म को कोई नहीं बचा सकेगा।
इससे पहले बसन्त पंचमी 23 जनवरी को इसी यूजीसी एक्ट का विरोध करने महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज अपने साथियों के साथ दिल्ली जंतर मंतर पर प्राणदान करने जा रहे थे,परन्तु गाजियाबाद पुलिस ने शिवशक्ति धाम डासना गाजियाबाद को पुलिस छावनी बना कर उनको मंदिर में ही नजरबंद कर दिया था।