आध्यात्मिक वातावरण में खेली फूलों‌ की होली

दीपक मिश्रा 
हरिद्वार।‌ अध्यात्म चेतना संघ (पंजी.), हरिद्वार के संस्थापक व संचालक आचार्य करुणेश मिश्र के मिश्रान गली, ज्वालापुर स्थित निवास पर होली मिलन कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें अन्तर्गत भक्ति संगीत की स्वर लहरियों के बीच काव्य,  हास्य-व्यंग्य और ब्रज के रसिया की रस धाराओं के मध्य फूलों की होली और नृत्य गान की आध्यात्मिक मस्ती उपस्थित भक्तजनों पर तारी रही।
आचार्य करुणेश मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन‌ करते हुए कहा कि- “होली का पर्व आते ही प्रकृति बहुत सुन्दर हो जाती है। पेड़ पौधे भाँति-भाँति के पुष्पों से लद जाते हैं।‌ मौसम भी सुहावना हो जाता है और ऐसे में व्यक्तियों का उल्लास और मस्ती भी अपने शिखर पर होती है, परन्तु हमें इस त्यौहार का आनन्द सम्पूर्ण शालीनता, सौहार्द तथा आपसी प्रेम व सम्मान को साथ रखते हुए ही लेना चाहिये।”
‌‌‌‌‌‌     कार्यक्रम का आरम्भ गणपति आराधना के साथ हुआ। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में महेश चन्द काला तथा विजेन्द्र पालीवाल ने हास्य व्यंग की काव्य रचनाएँ प्रस्तुत कीं।‌ अरुण कुमार पाठक ने ‘होली खेलत ब्रजनार कान्हा संग’, कंचन प्रभा गौतम ने ‘इन्द्रधनुष के रंगों में रंगा है मेरा मन’ तथा प्रेम शंकर शर्मा ने ‘मधुबन में‌ मेरो श्याम खिलाय रह्यो फूलों से होली’ जैसे हृदयस्पर्शी तथा उमंग भरे गीत प्रस्तुत किये। साधुराम पल्लव की हास्य कविताएँ खूब सराही गयीं।‌ गंगा जोशी,  प्रत्यूष आत्रेय, पंडित अनुराग शर्मा ने भी मधुरकंठ भक्ति गीत प्रस्तुत किये। इन्हें हारमोनियम पर ओम गोस्वामी, तबले पर विपिन मिश्रा तथा की-बोर्ड पर अमित रस्तोगी तथा ने संगत दी। कार्यक्रम का समापन फूलों की होली‌ के साथ हुआ। इस अवसर पर गंगासभा के अध्यक्ष नितिन गौतम, महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, प्रभांष मिश्र, अशोक सरदार, अर्चना वर्मा तिवारी, राघवेंद्री मिश्र, उपमा मिश्र, साधना शर्मा, अशोक कुमार गुप्ता, अनुष्का मिश्र आदि की विशेष उपस्थिति रही।

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