दीपक मिश्रा
हरिद्वार। हरिद्वार के आबादी वाले क्षेत्रों में जंगली हाथियों के घुसने का सिलसिला लगातार जारी है। कनखल क्षेत्र में हाथियों की चलहकदमी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो बिजली घर के नजदीक गंगा पर बने पुल का है, जहां कुछ हाथी तारबाड़ को तोड़कर आबादी में घुस आए। काफी देर तक हाथी आबादी में चहलकदमी करते रहे। हाथियों को देखकर लोगों में अफरा तफरी मच गई।
वायरल वीडियो में साफ तौर से देखा जा सकता है कि हाथियों का झुंड बेखौफ होकर रिहायशी इलाके में पहुंच गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह क्षेत्र पहले भी वन्यजीवों की आवाजाही के लिए संवेदनशील रहा है, लेकिन इस तरह खुलेआम बाधाएं तोड़कर प्रवेश करना चिंता का विषय है। हाथियों को समस्या का स्थाई समाधान होना चाहिए। वहीं रात को ही सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने हाथियों को जंगल में खदेड़ा। अधिकारी जल्द ही हाथी रोधी दीवार बनाकर हाथियों को रोकने का दावा कर रहे हैं।
जगजीतपुर और मिस्सर पुर में रोजाना आते हैं हाथी
हरिद्वार का अधिकतर आबादी वाला क्षेत्र जंगल से घिरा है। कहीं राजाजी टाइगर रिजर्व तो कहीं वन विभाग की सीमा है। सबसे ज्यादा प्रभावित हरिद्वार का मिस्सरपुर और जगजीतपुर क्षेत्र है। यहां बताया जाता है कि हाथी कॉरिडोर था। हाथी यहां रोजाना टहलने आते थे। आबादी बढ़ने के साथ जंगल सिमट गए लेकिन हाथियों ने यहां आना नहीं छोड़ा। अब ये हाथी लोगों के वाहनों को भी नुकसान पहुंचाने लगे हैं। कई बार तो किसानों की फसलों को भी तोड़ देते हैं। बीते दिनों भी कई वाहनों में हाथी तोड़फोड़ कर चुके हैं।
कुंभ मेले से पहले हाथी रोधी दीवार का प्रस्ताव नहीं हुआ पास
हाथियों को रोकने के लिए वन विभाग की ओर से हाथी रोधी दीवार बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। कुंभ मेले के बजट से बैरागी कैंप से लेकर अजीतपुर गांव तक करीब आठ किलोमीटर लंबी हाथी रोधी दीवार बनाई जानी है। इसके साथ ही बराबर में सोलर फेंसिंग भी लगाई जाएगी। अभी तक इसकी स्वीकृति नहीं मिली है।
क्या बोले अधिकारी
सूचना मिलते ही रात को वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथियों को फिर से जंगल में खदेड़ा गया। हाथियों की मूवमेंट पर नजर रखने के लिए क्यूआरटी की तैनाती की गई है। हाथी रोधी दीवार की अनुमति मिलते कार्य शुरू किया जाएगा और संभवतः इस समस्या का स्थाई समाधान किया जाएगा।
शीशपाल सिंह, रेंज अधिकारी, हरिद्वार वन विभाग