निद्रा तथा मृत्यु के बीच चेतना मनुष्य का अस्तित्व है। कर्म-फल के कारण सबकी चेतना प्रभावित होती

दीपक मिश्रा 

हरिद्वार- 22 जुलाई 2026 निद्रा तथा मृत्यु के बीच चेतना मनुष्य का अस्तित्व है। कर्म-फल के कारण सबकी चेतना प्रभावित होती है। गुरूकुल कांगडी समविश्वविद्यालय, हरिद्वार मे शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के पर्याय मे माता लालदेवी यज्ञशाला मे आयोजित मासिक यज्ञ के अवसर पर विज्ञान तथा दर्शन पर मार्मिक चर्चा करते हुये कुलपति प्रो0 प्रतिभा मेहता लूथरा ने सार्वभौमिक प्रश्न- हम कौन है और किस उददेश्य की पूर्ति के लिए मानव जन्म मिला है। व्यक्ति सम्पूर्ण जीवन मे इस प्रश्न की तलाश मे अन्त तक पहुॅच जाता है लेकिन अन-उत्तरीत रहता है। केवल आत्मा तथा चेतना के महत्व को समझ कर इस दिशा मे सार्थक पहल सम्भव है। पंचभूतों से निर्मित शरीर से तैयार होने वाले संयत्र केवल मानव द्वारा भौतिकतः व्यवस्था को नियत्रित कर सकते है। लेकिन मानव रूपी संय़़त्र का निर्माण केवल परमात्मा द्वारा ही सम्भव है। वर्तमान रोबोटिक्स साईंस तथा ए0आई0 इस दिशा मे वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ रही है जिससे जीवन यापन सरल तथा जटिल दोनो व्यवस्थाओं मे संचालित होना सम्भावित है। कुलसचिव प्रो0 सत्यदेव निगमालंकार की उपस्थिति एवं डॉ0 दीनदयाल वेदालंकार के आचार्यत्व मे यज्ञ सम्पन्न हुआ। प्रभारी, डॉ0 अजय मलिक, डॉ0 वेदव्रत, डॉ0 शिवकुमार चौहान, डॉ0 कपिल मिश्रा, डॉ0 प्रणवीर सिंह, डॉ0 मदन लाल जाट, डॉ0 भारत वेदालंकार, सुनील कुमार, डॉ0 अजेन्द्र कुमार, डॉ0 हरेन्द्र मलिक, डॉ0 भूपेन्द्र आर्य, आदि उपस्थित रहे।

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