दीपक मिश्रा
भाजपा राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष व सांसद राज्य सभा डा. नरेश बंसल ने सदन के माध्यम से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री से अतारांकित प्रश्न सं0 411 के अंर्तगत नेशनल हाई-स्पीड काॅरिडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण संबिधत प्रश्न किया’
डा. नरेश बंसल ने प्रश्न किया कि क्या सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः
क- क्या सरकार ने वर्ष 2026 के दौरान नेशनल हाई-स्पीड काॅरिडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रगति की समीक्षा की है और यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है।
ख- चल रहे और पूर्ण हो चुके नेशनल हाई-स्पीड काॅरिडोर और एक्सप्रेसवे परियोजना की राज्यवार स्थिति क्या है और अब तक आवंटित, निर्माणाधीन और पूर्ण की जा चुकी लंबाई का ब्यौरा क्या है
ग- क्या संशोधित कार्यान्वयन तंत्रों या अनुबंध संबंधी सुधारों के माध्यम से विलंबित राजमार्ग और एक्सपे्रसवे परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के लिए कोई उपाय किए गए हैं। और
घ- यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है?
इस महत्वपूर्ण प्रश्न के उत्तर मे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी जी ने बताया कि
क- सरकार ने नेशनल हाईस्पीड काॅरीडोर और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे सहित सभी चल रही परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा के लिए एक तंत्र (फ्रेमवर्क) स्थापित किया हैं इसमें संबंधित राज्य सरकार सहित सरकार के राज्य और केंद्र स्तर पर सभी हितधारकों को शामिल करते हुए परियोजना की समीक्षा शामिल है।
ख- देशभर में कुल 10,389 किलोमीटर नेशनल हाई-स्पीड काॅरिडोर के लिए आवंटन किया गया है, जिनमें से 4,809 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है और 5,580 किलोमीटर निर्माणाधीन है। आवंटित लंबाई, निर्माणाधीन, पूूर्ण और परिचालन में मौजूद नेशनल हाई स्पीड काॅरिडोर और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की राज्यवार स्थिति अनुलग्न पर संलग्न है।
ग और घ- परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए सरकार ने विभिन्न विभागों में पहल की है। इनमें भूमि अधिग्रहण को सुव्यवस्थित और त्वरित करने केेेेेेे लिए भूमिराशि पोर्टल और जीआईएस आधारित भूमि अधिग्रहण योजना का उपयोग करना, वन और पर्यावरण मंजूरी को तेजी से सक्षम करने के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के माध्यम से परिवेश पोर्टल का नवीनीकरण करना, रेलवे से सड़क उपरिपुल/सड़क अधोगामी पुल (आरओबी/आरयूबी) के सामान्य व्यवस्था आरेख (जीएडी) की ऑनलाइन मंजूरी को सक्षम करना और राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के सक्रिय सहयोग से चल रही परियोजनाओं में बाधाओं/अवरोधों की समीक्षा और समाधान के कार्य तंत्र का लाभ उठाना शामिल है।