चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उत्तराखंड देहरादून ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति न होने देने की साजिश करने के लिए कार्यालय महानिदेशालय चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण देहरादून को जिम्मेदार ठहराते हुए आक्रोश जताया है और निष्पक्ष जांच की मांग माननीय मुख्यमंत्री जी माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी से की

दीपक मिश्रा 

चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उत्तराखंड देहरादून ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति न होने देने की साजिश करने के लिए कार्यालय महानिदेशालय चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण देहरादून को जिम्मेदार ठहराते हुए आक्रोश जताया है और निष्पक्ष जांच की मांग माननीय मुख्यमंत्री जी माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी से की है।
दिनांक 07 अगस्त 2026 चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उत्तराखंड की एक आपात कालीन वर्चुअल बैठक हुई जिसमें महानिदेशालय देहरादून द्वारा पिछले दस वर्षों से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति न होने देने की साजिश का आरोप महानिदेशालय पर लगाया है उन्होंने बताया कि तीन तीन बार महानिदेशक महोदया से समझौता पदोन्नति को लेकर चूंकि लिपिक संवर्ग में पदों की कमी के कारण अन्य पदों जैसे लेब सहायक, डार्क रूम सहायक, ओ टी सहायक, एवं वाहन चालक के पदों पर पदोन्नति की जानी थी किन्तु महानिदेशालय द्वारा फाइल को कई वर्षों से वहीं घुमाया जा रहा है इससे पूर्व कुछ कनिष्ठ सहायक के पदों के लिए पिछले वर्ष 2025में कर्मचारियों की पदोन्नति हेतु आवेदन पत्र मांगे गए थे किंतु एक साल के लगभग हो गया है किंतु पदोन्नति करने की जगह पदोन्नति को लटकाने की साजिश के तहत फिर से प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों से कर्मचारियों के नाम मांगे जा रहे हैं जिससे अन्य संवर्ग को उसका लाभ दिया जा सके और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति लटकी रहे संगठन को महानिदेशालय की इस तरह की कार्यवाही से साजिश की बू आ रही है उनकी मांग है कि माननीय मुख्य मंत्री जी माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी से मिलकर इस संबंध में शासन स्तर की जांच बैठाकर इस संबंध में तत्काल कार्यवाही करने का अनुरोध करेंगे।
प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा महामंत्री सुनील अधिकारी प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष गिरीश पंत प्रदेश संगठन सचिव छत्रपाल सिंह जिला मंत्री राकेश भंवर ने कहा कि कर्मचारियों की पदोन्नति 1996 के बाद 2016 में हुई थी किन्तु महानिदेशालय द्वारा उसमें भी 78 पदों के जगह सिर्फ 47पदों पर चतुर्थ श्रेणी एवं तीन पदों पर वाहन चालक की पदोन्नति हुई थी 28पद चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रह गए थे जिसके लिए संगठन द्वारा तत्काल पत्राचार करते हुए 10 अगस्त 2016 को अनुरोध किया गया था कि जिन कर्मचारियों की की डिप्रेशन 4000 से नीचे आई है उनमें से 28 कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची बनाकर जिन कर्मचारियों की 2500की डिप्रेशन तक स्पीड है उनको पदोन्नति देकर तीन माह का समय देकर दोबारा टाइप टेस्ट ले लिया जाए हमारे पद भी बचे रहेंगे और कर्मचारियों की पदोन्नति भी हो जाएगी क्योंकि वह कोटा सिर्फ 2016 तक ही वैध था किंतु महानिदेशालय की हठ धर्मिता के कारण वो पद समाप्त हो गए या जानबूझकर ये साजिश रची गई थी ये भी जांच का प्रश्न है संगठन द्वारा 2020,2021, में तीन तीन बार महानिदेशक महोदया और निदेशक, महोदय एवं प्रदेश पदाधिकारियों के बीच समझौते हुए कि अगर कनिष्ठ सहायक पद कम होने की दशा में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को आई पी एच एस मानको के तहत पशुपालन विभाग नियमावली 2019 की तर्ज पर जिन पदों पर कर्मचारी पहले से ही कार्य कर रहे हैं उन पदों पर लेब सहायक, डार्क रूम सहायक, ओ टी सहायक, वाहन चालक के पदों पर पदोन्नति कर दी जाएगी जबकि इन पदों पर पदोन्नति से सरकार शासन को कोई भी वित्तीय भार नहीं पड़ेगा कर्मचारी वर्तमान में 1900,2000,2400,2800, ग्रेड पे ले रहे हैं किंतु महानिदेशालय देहरादून द्वारा पिछले दस वर्षों से किसी भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति नहीं दी गई जबकि विभागीय संवर्ग, लिपिक, नर्सिंग अधिकारी, फार्मेसी अधिकारी, एक्सरे टेक्नीशियन, लेब टेक्नीशियन को पदोन्नति या पदोन्नति ग्रेड पे बढ़ा दिया गया महानिदेशालय देहरादून द्वारा सिर्फ चतुर्थ श्रेणी संवर्ग को छोड़कर सभी संवर्ग के कर्मचारियों को अधिकारी का दर्जा दे दिया गया है और यह सब प्रस्ताव महानिदेशालय देहरादून द्वाराबनाकर भेजे गए हैं बस सिर्फ चतुर्थ श्रेणी संवर्ग से ही इन्हें पता नहीं क्या आपत्ति है या फिर इनकी सोच है कि इन्हें ऐसे ही रहने दिया जाए ये इसी पद से सेवानिवृत्त हो जाएंगे सिर्फ चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारियों की पदोन्नति का प्रस्ताव नहीं भेजा जाता है।महानिदेशालय स्वास्थ्य द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा जो पदोन्नति में पूरी सेवाकाल में शिथिलीकरण के आदेश शासन द्वारा कराए गए है इन्हें भी दरकिनार किया जा रहा है एक ही प्रदेश में दो कानून हो रहे हैं पशुपालन विभाग के सभी हाई स्कूल और इंटरमीडिएट पास कर्मचारियों को वन टाइम सेटलमेंट के तहत वैक्सीनेटर बना दिया गया है किंतु स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जो वर्षों से उन्हीं पदों पर कार्य कर रहे हैं उन्हें लेब सहायक, डार्क रूम सहायक, ओ टी सहायक बनाने के लिए आई पी एच एस मानको के तहत समझौता होने के बाद भी पदोन्नति नहीं दी जा रही है जो अन्याय करने की एक पराकाष्ठा है।
जबकि एक ही विभाग में सेवा कर रहे हैं किंतु नर्सिंग संवर्ग को पौष्टिक आहार भत्ता दिया जाता है मरीजों के संपर्क में रहने के कारण किंतु वही चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ कब से मांग कर रहा है कि जब मरीजों के संपर्क में नर्सिंग संवर्ग और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रहते हैं तो उनको भी पौष्टिक आहार भत्ता दिया जाना न्यायोचित होगा किंतु यहां भी अन्यायपूर्ण रवैया रहा है महानिदेशालय का वर्दी भत्ते का शासनादेश होने के बाद भी वर्दी भत्ता वेतन में नहीं लगाया जा रहा हैवहां भी बजट का बहाना बनाया जा रहा है,कर्मचारियों को वर्दी धुलाई भत्ता सिर्फ 90 रुपए दिया जाता है जिसमें कोट पेंट दो पेंट शर्ट धुलने हैं जबकि अन्य संवर्ग को 500 रुपए दिया जाता है।
प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र तेश्वर, प्रदेश उपाध्यक्ष नेल्सन अरोड़ा ने बताया कि सिंचाई विभाग, शिक्षा विभाग, कलेक्ट्रेट विभाग, पशुपालन विभाग, उद्यान विभाग में पदोन्नति कई बार कर दी गई है और वो भी सामान्य स्तर से जबकि स्वास्थ्य विभाग पदोन्नति अगर करवाएगा तो जिस तरह किसी अधिकारी संवर्ग की परीक्षा होती है उस तरह क्योंकि उन्हें पता है जो कर्मचारी वार्ड में मरहम पट्टी, ओ टी, और लेब, वार्ड में कार्य करने वाले हैं वो कितने ही टाइप टेस्ट में पास हो पाएंगे इसलिए जो पद रह जाएंगे उन पर जो समायोजन के लिए अधिसख्यक पद के कर्मचारी है उनका समायोजन कर दिया जाएगा जिस तरह इनके द्वारा पहले भी किया गया और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद कम होते चले गए या धीरे धीरे समाप्त कर दिए जाएंगेयही साजिश रची जा रही है। इसलिए माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी से अनुरोध है कि कृपया विभागीय जांच न कराकर शासन स्तर जांच कराने की कृपा करेंगे जिससे कि हमारे चतुर्थ श्रेणी संवर्ग के साथ न्याय हो सके और सभी पदों पर हमारे संवर्ग की पदोन्नति हो सके।
बैठक में सर्व श्री दिनेश लखेडा, छत्रपाल सिंह, अशोक कुमार, राकेश भंवर, राजेन्द्र तेश्वर सचिन, मूल चंद चौधरी, नाथी राम रजनी देवी,सुरेंद्र सिंह इत्यादि शामिल थे।

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