मानवता का आधार आध्यात्मिक है। आध्यात्मिक दृष्टि से ही प्रकृति को सही भाव में समझा जा सकता है

दीपक मिश्रा 

मानवता का आधार आध्यात्मिक है। आध्यात्मिक दृष्टि से ही प्रकृति को सही भाव में समझा जा सकता है। प्रकृति एवं आध्यात्मिकता मनुष्य जीवन के आधार है। प्रकृति के नजदीक जाकर ही संस्कृति को पहचाना जा सकता है। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के भेषज विज्ञान विभाग द्वारा फार्मास्यूटिकल साइंस, हेल्थ केयर, बायोटेक्नोलॉजी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए आयाम विषय पर दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय महासम्मेलन का शुभारम्भ समविश्वविद्यालय सभागार में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही पदमश्री संतोष यादव ने सभागार में अपने संबोधन में कहा कि आर्थिक हित में किया गया कार्य राष्ट्र व समाज के लिए सदैव कल्याणकारी नहीं हो सकता। विचार शुद्ध न होने से व्यक्ति स्वस्थ नहीं रह सकता। जीवन में पांच तत्वों में आकाश को आधार मानकर कहा कि वायु से ध्वनि और ध्वनि से शब्द मिलकर ही विचार बनते हैं। इसलिए विचारों का शुद्ध होना ही विज्ञान का मूल आधार है। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आरम्भ हुआ। प्रतिभागियों ने वंदे मातरम गीत के माध्यम से अपनी प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पूर्व स्नातक रणवीर आर्य ने कहा कि मानव स्वास्थ्य की संकल्पना आयुर्वेद के बिना अधूरी है। भारतीय संस्कृति एवं साहित्य के प्रमाणिक ग्रंथों से ज्ञात होता है कि प्राचीन ऋषि-मनीषियों का जीवन प्रकृति के नजदीक तथा औषधीय सम्पदा से परिपूर्ण रहा जिससे आरोग्य एवं खुशहाल जीवन यापन करते हुए प्रकृति संरक्षण में अपना अमूल्य योगदान दिया।
अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक प्रो0 सत्येन्द्र राजपूत ने दो दिवसीय संगोष्ठी की रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि फार्मास्यूटिकल साइंस जहां औषधियों के माध्यम से रोग निवृत्ति एवं स्वास्थ्य प्रदान करती है वहीं तकनीकी ज्ञान नवाचार तथा शोध के माध्यम से नयी चुनौतियां एवं समाधान प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि फार्मास्यूटिकल, बायोटेक्नोलॉजी, प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा एवं कृत्रिम बौद्धिकता के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं। रिसर्च एण्ड डवलपमेंट के निदेशक, डा0 सुहास ने मूल शोध कार्यो के माध्यम से नई तकनीकी विकसित करने के लिए युवाओं का आहृवान किया।
अन्तर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में स्कूल ऑफ मेडिसिन, टेक्सास विश्वविद्यालय के डा0 सुभाष चन्द्र चौहान, एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा के प्रो0 अमरनाथ मिश्रा, अमेरिका से डा0 मुरली एम0 यल्ल्पू, डा0 डाई किम एवं डा0 सीमा खान, एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा से डा0 हर्षा खर्कवाल, डा0 स्वाति मदान ने अपने शोध पत्रों के माध्यम से फार्मास्यूटिकल, हेल्थकेयर, बायोटैक्टानालॉजी तथा ए0आई0 द्वारा चिकित्सा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचार पर प्रस्तुतीकरण किया।
अन्तर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस में डा0 अमेन्द्र मिश्रा, डा0 सौरभ मुन्द्रा, डा0 श्यामदेव, डा0 बी0एम0 योगी, डा0 विक्रम सिंह चौहान, डा0 अभिषेक चौहान तथा डा0 अशोक ने भी उद्घाटन सत्र में अपने विचार व्यक्त किए। अन्तर्राष्ट्रीय कांफ्रेस के पहले दिन ऑनलाइन तथा ऑफलाइन माध्यम से विभिन्न सत्रों में 200 प्रतिभागियों ने शोध पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुत किए। उद्घाटन सत्र में अतिथियों का स्वागत एवं आभार डा0 कपिल कुमार गोयल द्वारा किया गया वहीं प्रतिभागियों के शोध पत्रों का मूल्यांकन डा0 गगन माटा, डा0 विनित बिश्नोई आदि की टीम द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रो0 एल0पी0 पुरोहित, डा0 विपिन कुमार, डा0 विनोद नौटियाल, डा0 अश्वनी कुमार, डा0 पीयूष सिंघल, डा0 नितिन कुमार जनसम्पर्क अधिकारी डा0 शिव कुमार चौहान, डा0 प्रिंस, डा0 रविन्द्र काम्बोज, बलवंत सिंह रावत, ओम प्रकाश जोशी, राहुल सिंह, नीरज कुमार, कुलभूषण शर्मा, जतिन्द्रर मोहन डा0 गौरव दीप सिंह भिडर, डा0 रोशन लाल, मनोज कुमार, अनुज त्यागी, रविन्द्र कुमार, नितिन चौहान, हरेन्द्र कुमार, मंजीत सिंह, सूरज, संजय आदि उपस्थित रहे।

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