आयुर्वेद दिवस पर हरिद्वार में संगोष्ठी, विशेषज्ञों ने रखे विचार

दीपक मिश्रा 

हरिद्वार। आयुर्वेद दिवस के अवसर पर रविवार को ऋषिकुल राजकीय आयुर्वैदिक फार्मेसी, हरिद्वार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी और अधीक्षक के संयुक्त तत्वावधान में हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अधीक्षक डॉ. अशोक तिवारी एवं उप जिला अधिकारी डॉ. अतुल नेगी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) अजय कुमार गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं विभागाध्यक्ष (शल्य), ऋषिकुल परिसर, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय उपस्थित रहे। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में साईं वेदा वैलनेस के संचालक श्री अग्रवाल और विशिष्ट आमंत्रित अतिथि के रूप में जिला आयुर्वेदिक संघ के अध्यक्ष डॉ. अवनीश उपाध्याय मौजूद रहे।

आयुर्वेद का विकास कालानुसार सतत प्रवाहित परंपरा : डॉ. अवनीश उपाध्याय

डॉ. अवनीश उपाध्याय ने कहा कि आयुर्वेद केवल ऐतिहासिक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि यह कालानुसार विकसित और प्रवाहित होती परंपरा है। वैदिक काल से लेकर आज की आधुनिक प्रयोगशालाओं तक आयुर्वेद ने अपने स्वरूप में व्यापक बदलाव किया है। उन्होंने बताया कि चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और रसशास्त्र से लेकर वर्तमान औषधि निर्माण पद्धतियाँ आयुर्वेद को वैश्विक चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित कर रही हैं।

जीवनशैली आधारित रोगों में कारगर है आयुर्वेद : डॉ. अजय गुप्ता

मुख्य अतिथि डॉ. अजय गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मोटापा जैसी बीमारियाँ मुख्य रूप से जीवनशैली से जुड़ी हुई हैं। आयुर्वेद में आहार-विहार, अग्नि, पथ्य और अपथ्य पर आधारित सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। सही आहार और दिनचर्या से न केवल रोगों का उपचार संभव है, बल्कि रोगों की रोकथाम भी संभव है।

संहिताएँ प्रमाणिक और प्रासंगिक : डॉ. अशोक तिवारी

डॉ. अशोक तिवारी ने कहा कि हमारी आयुर्वेदिक संहिताएँ केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि प्रमाणिक और व्यवहारिक मार्गदर्शिका हैं। इनमें रोग निदान, उपचार तथा रोग प्रतिरोध की स्पष्ट व्यवस्था दी गई है। उन्होंने कुटी प्राविधिक चिकित्सा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी प्राचीन समय में थी।

इस अवसर पर डॉ. अतुल नेगी ने संगोष्ठियों में आयुर्वेद आधारित आहार-पेय प्रस्तुत करने की आवश्यकता बताई। डॉ. घनेन्द्र वशिष्ठ, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय आयुष मिशन, ने रामचरितमानस में वर्णित चिकित्सा सोपानों के महत्व को रेखांकित किया। संगोष्ठी का संचालन डॉ. मनीषा चौहान ने किया।

संगोष्ठी में जिला संघ के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार, नोडल अधिकारी डॉ. विक्रम रावत, चिकित्साधिकारी गण—डॉ. नवीन कुमार दास, डॉ. भास्कर आनंद, डॉ. विकास दुबे, डॉ. विश्वजीत मांझी, डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ. अश्वनी कौशिक, डॉ. वीरेंद्र रावत, डॉ. रेनू सिंह, डॉ. सुजाता, डॉ. दीक्षा शर्मा, डॉ. सोरमी, डॉ. सुष्मिता, डॉ. करुणा नेगी, प्रबंधक डॉ. दीपिका वर्मा तथा ऋषिकुल परिसर के स्नातकोत्तर विभाग के छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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