हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने का समय आ गया- डा. अशोक गिरि

दीपक मिश्रा 

हरिद्वार। श्रवण सेवा एवं शोध संस्थान तथा हिन्दी सेवा समूह के संयुक्त तत्वावधान में नगर में प्रथम बार हिन्दी के महान सेवक भारतरत्न राजर्षि पुरुषोत्तमदास टंडन जी की 143वीं जन्म जयन्ती पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। खड़खड़ी स्थित दैनिक प्रार्थना आश्रम के सभागार में आयोजित किया गये इस कार्यक्रम में हिन्दी के अनेक विद्वानों, साहित्यकारों तथा कवियों ने अपने-अपने वक्तव्यों तथा काव्यपाठ के माध्यम से भारत रत्न पुरुषोत्तमदास टंडन जी को याद किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती तथा राजर्षि जी के सम्मुख दीप प्रज्वलन, पुष्पार्पण तथा वृन्दा शर्मा की सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की। सभी ने टंडन जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। इसके उपरान्त वक्ताओं ने टंडन जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बारे में विस्तार से अपने विचार रखे। इनमें वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र हर्ष, कार्यक्रम अध्यक्ष पं. ज्वाला प्रसाद शांडिल्य (वरिष्ठ साहित्यकार), मुख्य अतिथि प्रो. संजीव मेहरोत्रा (प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय भूपतवाला) विशिष्ट अतिथि डा. एन.पी. सिंह (हिन्दी विभागध्यक्ष, देव संस्कृति विश्वविद्यालय), डा. अरविन्द नारायण मिश्रा, आयोजक डा. अशोक गिरि (संस्थापक श्रवण सेवा एवं शोध संस्थान), अरुण कुमार पाठक (संपादक चेतना पथ), प्रदीप शर्मा, डा. मेनका त्रिपाठी आदि शामिल रहे। सभी वक्ताओं ने टंडन जी के हिन्दी प्रेम तथा हिन्दी के लिये उनके योगदान को याद किया और कहा कि टंडन जी एक महान हिन्दी सेवक होने के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, अधिवक्ता, साहित्यकार, राजनेता, समाज सेवक तथा चिंतक भी थे।
कार्यक्रम में संयोजिका डा. अर्चना रानी वालिया (सहायक प्रवक्ता-हिन्दी, राजकीय महाविद्यालय, भूपतवाला, डॉ• अरविन्द नारयण मिश्र, अभिनन्दन ‘अभिरसमय’, बृजेन्द्र हर्ष, डा. मेनका त्रिपाठी, डा. रजनी रंजना, दीपा माहेश्वरी, डा. श्याम बनौधा तालिब, कंचन प्रभा गौतम, लीना इंशा, डा. संजीव भट्ट, दीपक पंवार (संवाद चैनल), दीनदयाल दीक्षित, डा. सुशील त्यागी, प्रदीप शर्मा और वृन्दा शर्मा, सुयश केसरवानी, प्रमोद गिरि, प्रेमी शंकर शर्मा ‘प्रेमी’, आदर्शिनी श्रीवास्तव, चाँद गिरि और सुमनलता इत्यादि ने हिन्दी पर कविता किया।
संचालिका व ओज कवयित्री अपराजिता ‘उन्मुक्त’ के साथ ही दीनदयाल दीक्षित, डा. सुशील त्यागी, प्रदीप शर्मा और वृन्दा शर्मा को हिन्दी सेवा समूह को विशेष सहयोग देने के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अन्त में, डा. अशोक गिरि ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, कि “अब हिन्दी को राष्ट्रभाषा का स्थान दिलाने का समय आ गया है। हमें इसके लिए अपने-अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे।

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