दीपक मिश्रा
आज़ राखी का त्योहार पूरे देश में मनाया गया। शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी घर-घर रक्षाबंधन का उत्साह देखने को मिला। कई परिवारों में दूर-दराज रहने वाले भाई-बहन इस खास दिन के लिए घर लौटे। इससे मिलन का माहौल और भी खुशनुमा बन गया। रक्षाबंधन ने एक बार फिर भाई-बहन के रिश्ते में स्नेह और विश्वास की डोर को मजबूत किया। हर घर में प्रेम, अपनापन और उत्सव की खुशबू महसूस की गई।
आजकल ये त्योहार सिर्फ सगे भाइयों तक सीमित नहीं रह गया है। राखी अब उन लोगों को भी बांधी जाती है जिन्हें बहनें अपना संरक्षक मानती हैं। जैसे चचेरे भाई, मित्र या फिर रक्षासूत्र सेना के जवानों तक भी पहुंचता है। आज के डिजिटल युग में भी रक्षाबंधन की भावना कम नहीं हुई है। जो भाई-बहन एक-दूसरे से दूर हैं, वे ऑनलाइन राखी भेजते हैं, वीडियो कॉल पर मिलते हैं और डिजिटल गिफ्ट्स से अपने रिश्तों की मिठास बनाए रखते हैं। रक्षाबंधन केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा पवित्र बंधन है, जो परिवार को एकजुट करता है।
रक्षाबंधन बच्चों को संस्कार, रिश्तों की अहमियत और जिम्मेदारी बताता है।
रक्षाबंधन केवल धागे का त्योहार नहीं बल्कि भावनाओं, स्नेह और सुरक्षा का प्रतीक है. यह पर्व हमें सिखाता है कि रिश्ते समय, दूरी और परिस्थितियों से ऊपर होते हैं। यह त्योहार सिर्फ खुशी और तोहफों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी की याद भी दिलाता है कि हमें अपने रिश्तों की रक्षा करनी है और उन्हें सम्मान देना है। हेमन्त नेगी