राष्ट्रीय कवि संगम की कवि गोष्ठी

दीपक मिश्रा 

हरिद्वार‌। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आज राष्ट्रीय कवि संगम की हरिद्वार इकाई ने नगर के वरिष्ठ कवि एवं गीतकार रमेश रमन के द्वारिका विहार स्थित आवास पर एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया जिसमें अधिकांश रचनाकारों ने अपनी अपनी विद्या में देवाधिदेव महादेव को अपनी काव्यांजलियाँ प्रस्तुत कीं, जबकि अन्य कवियों ने विभिन्न विषयों पर कविता पाठ प्रस्तुत किया।
माँ सरस्वती के विग्रह के सम्मुख दीप प्रज्वलन तथा पुष्पार्पण तथा अपराजिता ‘उन्मुक्त’ की वाणी वंदना के साथ रमेश रमन की अध्यक्षता तथा प्रभात रंजन के कुशल संचालन में गोष्ठी में युवा कवि दिव्यांश ‘दुष्यंत’ ने- ‘शिव शिव शंकर रूप भयंकर शीश झुकाकर नमन करूँ, शशि रंजन ‘समदर्शी’ ने ‘ध्यान मग्न बैठे शिव शंकर शिवगन खड़े करें फरियाद, शैलसुता सज-धज बैठी हैं चलकर कर दो पूर्ण मुराद’, आशा साहनी ने ‘रात हो शिवरात्रि तो जागरण सरल हुआ’‌, वृंदा वाणी ने शरण शरण में शंकर शिव है शत्रु दल का क्रंदन है’ तथा अवनीत कुमार ने ‘शिवरात्रि के दिन आते हैं तो मंदिरों में भीड़ बड़ी लग जाती है’ कह कर काव्य शिव आराधन किया, तो प्रभात रंजन ने ‘माँ शारदे तुझको नमन तुझको नमन शतवार है’ तथा अनूप सनातन ‘देखकर तेरी दशा गौ माता रोना मुझको आता है’ के साथ क्रमशः माँ सरस्वती व गौमाता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। चेतना पथ के संपादक व कवि अरुण कुमार पाठक ने अपनी ग़ज़ल ‘याद तुम्हारी करते-करते कितने सावन बीत गये, तुम‌ क्या जानो प्यास में मेरी दृग ये कैसे रीत गये’ प्रस्तुत की‌।
गोष्ठी के मेजबान रमेश रमन ने ‘गोष्ठी की फूलों ने सुनहरी धूप के आंगन में’,‌ अरविंद दुबे ने ‘मरने से पहले क्या मरना, इतना डरना भी क्या डरना’ तथा अपराजित ने ‘संभाले रखना लाठी धोती सब यह खानदानी है, छिपा आशीष इसमें है बुजुर्गों की निशानी है’ सुनाकर ख़ूब तालियाँ बटोरी। गोष्ठी के दौरान ही राष्ट्रीय कवि संगम हरिद्वार इकाई में अपराजिता ‘उन्मुक्त’ को गोष्ठी प्रमुख और प्रभात रंजन को जिला मंत्री पद के उत्तरदायित्व सौंपे गये। गोष्ठी के श्रोताओं में श्रीमती सुनीता चौधरी, श्रीमती प्रीति तथा विक्रम जी की विशेष उपस्थिति रही।

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