समाज को सांस्कृतिक रूप से एकजुट करने में संत महापुरूषों की अहम भूमिका -श्रीमहंत रविंद्रपुरी

दीपक मिश्रा 
हरिद्वार, 10 जनवरी। आद्य जगद्गुरू श्री रामानन्दाचार्य महाराज की 726वीं जयंती के अवसर पर श्री रामानन्दीय श्री वैष्णव मण्डल के संयोजन में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। श्रवणनाथ नगर स्थित श्री गुरू सेवक निवास उछाली आश्रम से शुरू हुई शोभायात्रा नगर भ्रमण के पश्चात श्रवणनाथ नगर स्थित श्री रामानन्द आश्रम आचार्य महापीठ पहुंचकर संपन्न हुई। यात्रा का शुभारंभ श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज, श्रीमहंत राजेश्वर शरण महाराज देवाचार्य, श्रीमहंत राधानाथ दास महाराज कठिया बाबा एवं श्रीमहंत विष्णुदास महाराज ने नारियल फोड़कर किया। शोभायात्रा में सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूष और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि भारत के संतो, मनीषीयांे और महापुरूषांे ने समाज को सांस्कृतिक रूप से एकजुट करने में अहम भूमिका निभायी है। आद्य जगद्गुरू रामानन्दाचार्य महाराज ने भक्ति की धारा को जन-जन तक पहुंचाया और सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रबोध की अलख जगाई। आद्य जगद्गुरू रामानंदाचार्य की परंपरा को श्री रामानन्दीय वैष्णव मण्डल जिस प्रकार सफतापूर्वक आगे बढ़ा रहा है। वह सभी के लिए प्रेरणादायी है।
श्रीमहंत विष्णुदास महाराज ने कहा कि जगद्गुरू रामानंदाचार्य सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर भक्ति, प्रेम और मानवता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी को जगद्गुरू रामानन्दाचार्य महाराज की शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए मानव कल्याण में योगदान करना चाहिए।
बाबा हठयोगी एवं महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा कि आद्य जगद्गुरू रामानन्दाचार्य महाराज ने समाज को भक्ति में ही शक्ति है और सेवा ही सच्ची साधना है, का संदेश दिया। उन्होंने पूरे देश का भ्रमण कर जनजागरण कर कुरीतियों को दूर किया और समाज में समरसता का वातावरण बनाया।
इस अवसर पर महंत राजेश्वर शरण महाराज देवाचार्य, महंत राधानाथ कठिया बाबा, महंत जसविन्दर सिंह, महंत जयेंद्र मुनि, महंत रघुवीर दास, स्वामी चिदविलासानंद, महंत सूर्यांश मुनि, महंत अरूण दास, महंत नारायण दास पटवारी, महंत प्रह्लाद दास, महंत दुर्गादास, महंत राजेंद्र दास, महंत प्रेमदास, महंत जयराम दास, महंत गणेश दास, महंत कैलाश मुनि सहित बड़ी संख्या में संत महापुरूष और श्रद्धालु भक्त शामिल रहे।

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