दीपक मिश्रा
हरिद्वार, 21 जनवरी। सनातन संस्कृति में देवात्मा हिमालय और पतित पावनी मां गंगा को लोक कल्याणकारी एवं प्रकृति और अध्यात्म का आधार स्तंभ माना गया है, सातों पुरियों में प्रमुख मायापुरी जो गंगा और हिमालय के मुख्य केंद्र धार्मिक नगरी हरिद्वार को बैकुंठ के द्वार के रूप में सर्वमान्यता मिली है। प्रकृति की नैसर्गिकता और सनातन संस्कृति की मौलिकता वाली परम्पराओं को सजीव रखने के लिए केवल हरिद्वार ही एक ऐसी देवनगरी है जो सनातन धर्म की आध्यात्मिक राजधानी का दर्जा हासिल करने वाली सभी पात्रताएं पूर्ण कर रही है। हरिद्वार ही एकमात्र ऐसा तीर्थ है जहां ब्रह्मा, विष्णु, महेश त्रिदेव सामूहिक रूप से पूजे जाते हैं, वैसे तो हरिद्वार भोले की नगरी के रूप में प्रख्यात है यहां सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की उपस्थिति ब्रह्मकुंड के रूप में हरि की पैड़ी पर पूज्यनीय है तथा सृष्टि के पालनहार बद्री विशाल भगवान विष्णु यानि हरि (बैकुंठ) का तो द्वार ही है हरिद्वार। हिंदू धर्म सबसे प्राचीन होने के बावजूद अपनी आध्यात्मिक राजधानी की सर्वमान्यता गृहण नहीं कर पाया जबकि अन्य सभी नवसृजित धर्म संप्रदायों द्वारा अपने राजधानी केंद्र घोषित किए हैं। हरिद्वार को सनातन धर्म की आध्यात्मिक राजधानी की मान्यता दिलाने हेतु डॉ अर्चना सुयाल की अध्यक्षता में धर्मपरायण चिंतक वर्ग ने एक महत्वपूर्ण चिंतन मंथन बैठक आहुत की गई।
चिंतन मंथन बैठक में “आध्यात्मिक राजधानी हरिद्वार” एक जनअभियान संचालित करने वाली योजना बनाई जिसके तहत 100 कर्मठ एवं समर्पित सनातनी योद्धाओं को संगठित किया जाएगा। धर्मसत्ता,टी समाजसत्ता तथा राजसत्ता के साथ समन्वय कायम करके सनातनी वातावरण बनाने वाले आयाम स्थापित किए जाएंगे। हरिद्वार कुंभ 2027 तक हरिद्वार को सनातन धर्म की आध्यात्मिक राजधानी की मान्यता दिलाने वाले नियमित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि हरिद्वार से निकले संदेश के माध्यम से देश दुनिया में सनातनी माहौल बन सके। आध्यात्मिक राजधानी हरिद्वार अभियान की पहली बैठक में डॉ0 विजयपाल बघेल (ग्रीन मैन ऑफ इंडिया) को संयोजक तथा प्रमोद शर्मा और अनिल भारती को सह संयोजक सर्वसम्मति से घोषित किया गया। राष्ट्रीय स्वयं संघ के वरिष्ठ प्रचारक पदम जी के पावन सानिध्य में बैठक में उपस्थित सभी सनातनियों द्वारा हरिद्वार को आध्यात्मिक राजधानी की सर्वमान्यता दिलाने का संकल्प लिया गया। शीघ्र ही वरिष्ठ समाजसेवी जगदीश लाल पाहवा की अध्यक्षता में अभियान की रूपरेखा तैयार करने वाली विस्तृत चर्चा हेतु बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार संगठन के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्र रघुवंशी एवं दैशिक शास्त्र अध्ययन केंद्र के निदेशक सुरेश सुयाल द्वारा आध्यात्मिक राजधानी हरिद्वार अभियान को महाभियानये बनाने की पुरजोर पैरवी की, शिक्षाविद डॉ नरेश मोहन ने हरिद्वार की सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व को पौराणिकता प्रदान करने के लिए इसे आध्यात्मिक राजधानी मानने को जरूरी बताया। बैठक का संचालन अनिल भारती ने किया जिसमे शामिल होने वालों में प्रमुखतः आर एस एस जिला प्रचारक जयदीप जी, राजेश गोयल, जोगेंद्र तनेजा, विनोद मित्तल, देशराज शर्मा तथा मयंक गुप्ता आदि रह