दीपक मिश्रा
हरिद्वार। जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से हरिद्वार के बहादराबाद स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है। गुरुवार को शिविर के पहले दिन केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, योगगुरु स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण समेत आदिवासी जनजातीय समुदाय से जुड़े लोग उपस्थित रहे। इस दौरान संभाग, संवाद और समाधान को लेकर मंथन किया गया।
केंद्रीय मंत्री जुअल ओराम ने कहा कि चिंतन शिविर का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने प्रत्येक मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि आजादी के बाद आदिवासी समुदाय के साथ ही दलित, शोषित और पिछड़े वर्ग का विकास हो, अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। समाज के हर वर्ग का सर्वांगीण विकास हो। इसी को लेकर चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है। चिंतन शिविर में मंथन किया जा रहा है कि आदिवासी समाज के लिए सभी योजनाओं का पूर्ण तरीके से क्रियान्वयन हो। शिविर में मंथन के दौरान सामने आने वाली कमियों में सुधार किया जाएगा। उद्देश्य है कि आदिवासी समाज के साथ हर वर्ग 2047 तक विकसित और स्वर्णिम भारत बनाने में अपना योगदान दे सके।
योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि देश के आदिवासी, जनजाति और वनवासी लोगों को उनकी जड़ों से जोड़कर रखते हुए देश के भौतिक विकास में समर्थ सक्षम बना देना है कि उन्हें गर्व की अनुभूति हो। देश के विकास के लिए अपनी सांस्कृतिक विरासत को संभालते हुए विकास के नए आयाम गढ़ने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी सपना है कि विकसित भारत के सपने को पूरा करने में सभी मंत्रालय काम कर रहे हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस तरह के शिविर के बाद अंतिम पंक्ति में बैठा व्यक्ति भी शिखर पर बैठा दिखाई देगा। चिंतन शिविर में मंथन के बाद अंतिम व्यक्ति को अंत्योदय में पूर्णतः सफलता मिलेगी।