जीवन मे गति एवं प्रगति द्विपक्षीय व्यवस्था पर केन्द्रित रहती है। सफलता के साथ विफलता, अच्छे के साथ बुरा, कम के साथ अधिकता, सन्तुलन के साथ असन्तुलन ऐसे अनेक साक्ष्य इस प्रमाणिकता का आधार है

दीपक मिश्रा 

जीवन मे गति एवं प्रगति द्विपक्षीय व्यवस्था पर केन्द्रित रहती है। सफलता के साथ विफलता, अच्छे के साथ बुरा, कम के साथ अधिकता, सन्तुलन के साथ असन्तुलन ऐसे अनेक साक्ष्य इस प्रमाणिकता का आधार है। गुरूकुल कांगडी समविश्वविद्यालय, हरिद्वार मे शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग, दयानंद स्टेडियम प्रांगण मे नवीन सत्र के प्रशिक्षुओं को सम्बोधित करते हुये एसोसिएट प्रोफेसर डॉ0 शिवकुमार चौहान ने स्वास्थ्य शिक्षा एवं पर्यावरण चुनौतियॉ विषय पर युवा संवाद के अन्तर्गत व्यक्त किये। डॉ0 शिवकुमार ने कहॉ कि सफल एवं विफल व्यक्ति के जीवन मे सन्तुलन का योगदान आवश्यक है।

डॉ0 शिवकुमार ने कहॉ कि सफल व्यक्ति जीवन मे सन्तुलन से लाभ अर्जित करते हुये कठिनाईयों तथा चुनौतियों को कम कर सकता है। जिससे मन शांत रहता है और फैसले सही होते हैंए शरीर स्वस्थ रहता है और ऊर्जा बनी रहती है। परिवार और दोस्तों के साथ संबंध मजबूत होते हैं। थकान या बर्नआउट ;अत्यधिक थकानद्ध से बचाव होता है। अर्थात सफल व्यक्ति अपने जीवन में कामए सेहतए परिवार और आराम के बीच सही संतुलन बनाते हैंए जिससे वे मानसिक शांति के साथ आगे बढ़ते हैं। इसके विपरीतए असफल व्यक्ति या तो काम में पूरी तरह खो जाते हैं या संतुलन खो बैठते हैंए जिससे उनका तनाव बढ़ता है और वे लक्ष्य से भटक जाते हैं। अर्थात जीवन मे एक ही काम पर ज्यादा जोर देने से मानसिक दबाव बढ़ता है। खानपान और नींद बिगड़ने से बीमारियां घेर लेती हैं। अपनों को समय न देने से अकेलेपन का सामना करना पड़ता है। ऊर्जा के सही बंटवारे के अभाव में असफलता हाथ लगती है। उन्होने सफलता एवं विफलता के बीच पर्यावरण को महत्वपूर्ण एवं प्रभावी कारक बताया, जिसके द्वारा सुरक्षित एवं सम्पूर्ण लक्ष्य प्राप्ति सम्भव है। युवा संवाद मे एम0पी0एड0 तथा बी0पी0एड0 व बी0पी0ई0एस0 के छात्र उपसिथत रहे।

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