दीपक मिश्रा
हरिद्वार-17 अक्टूबर 2025 त्योहार एवं उत्सव भारतीय समाज की आत्मा है। यह भारत की अटूट एवं मजबूत परम्परा का सजीव उदाहरण है। भारतीय संस्कृति मे त्योहार तथा उत्सव को जनजागरण एवं चेतना जागृति का सशक्त माध्यम कहा गया है। गुरुकुल कांगडी समविश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ0 शिवकुमार चैहान ने छात्रों के साथ मनोवैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर चर्चा मे सम्मिलित होते हुये कहाॅ कि त्योहार एवं उत्सव एकता, सांस्कृतिक विविधता और साझा मूल्यों को दर्शाते है। ये परिवार और समुदाय को परम्पराओं औार आध्यात्मिकता से जुडने का मौका प्रदान करते है। त्यौहार मानव जीवन मे ऊर्जा तथा स्फूर्ति का संचार करके लक्ष्य प्राप्ति की दिशा मे रचनात्मकता तथा व्यवहार मे सकारात्मक चिन्तन को बढाते है। मनोविज्ञान की दृष्टि से त्योहार मानसिक तनाव तथा असीमित संवेदनाओं पर नियन्त्रण करने मे भी मददगार साबित होते है। आधुनिक समाज मे रिश्तों मे बिखराव तथा दिशाहीन सम्बधों को दिशा प्रदान करने मे त्यौहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आते है। डाॅ0 चैहान ने कहाॅ कि भारतीय संस्कृति इन मूल्यों तथा नैतिक परम्पराओं के आधार पर आनन्द की वाहिनी एवं उल्लास की सलिला कहलाती है। मानव कल्याण की दृष्टि से जीवन मे जिन वस्तुओं का महत्व है उनमे प्रमुख भाई-बहन का प्रेम (उत्साह एवं जिम्मेदारी निर्वहन का भाव), असत्य पर सत्य की विजय (गलत कार्यो के प्रति प्रज्ञा-बोध), शक्ति आराधना (शक्ति संचय एवं क्षमताओं का विस्तार), धनवंतरी (रोग-प्रतिरोध जागृति) आदि सम्पूर्ण व्यवस्थाओं मे त्योहारों को माध्यम बनाकर चेतना संचार का कार्य भारतीय संस्कृति की प्रधानता का आधार स्तम्भ है। चर्चा मे बी0पी0ई0एस0 के लवी कुमार, ओमप्रकाश, शिवांश अग्रवाल, किशोरी लाल, नमन त्यागी, हर्षित, विशाल चैहान, प्रिन्स ठाकुर, सर्वजीत यादव, विपिन सिंह तथा बी0पी0एड0 के लक्की कुमार, निमेष गौतम, निशान्त कुमार आदि ने भाग लिया।