दीपक मिश्रा
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के संस्कृत विभाग में रावनवमी के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्श और वर्तमान में उनकी प्रासंगिकता विषय पर परिसंवाद आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में आचार्य सत्यपति ने मंगलाचरण के साथ समागत विद्वज्जनों का परिचय प्रस्तुत किया। छात्र गगनदीप, शुभम्, इन्द्रदेव एवं सिद्धार्थ की मनोहारिणी प्रस्तुति ने सभी को मन्त्रमुग्ध कर दिया। मुख्यवक्ता के रूप में डॉ भारत वेदालंकार ने आदर्श राजा के रूप में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। प्रजा को अच्छी प्रकार से शासित करने वाला, प्रजा की सेवा करने वाला तथा उसको सुपथ पर चलाने वाला ही आदर्श राजा होता है और ये समस्त गुण मर्यादा पुरुषोत्तम राम में दिखाई देते हैं।
डॉ वेदव्रत ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आदर्श परिवार व्यवस्था है। त्याग और नैतिकता के बिना आदर्श परिवार का निर्माण सम्भव नहीं है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन त्याग एवं नैतिकता की प्रतिमूर्ति है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम धर्म के साक्षात् स्वरूपभूत हैं। वर्तमानकाल में क्षीण हो रही भारतीय संस्कृति को मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन संजीवनी प्रदान कर सकता है। डॉ विपिन बालियान ने कहा कि आदर्श पिता पुत्र पति भ्राता राजा और मित्र के रूप में मर्यादा पुरुषोत्तम राम का व्यक्तित्व हम सबको प्रेरित करता है। डॉ सुनीता रानी ने कहा कि माता सीता के बिना मर्यादा पुरुषोत्तम राम का व्यक्तित्व अपूर्ण है। माता सीता ने अपने व्यक्तित्व से यय प्रतिपादित किया कि पति के भाग्य का अनुसरण करना ही स्त्री का परम धर्म है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो ब्रह्मदेव ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में भगवत्ता को प्राप्त करने का सामर्थ्य है। किन्तु इस भगवत्ता को प्राप्त करने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन में विद्यमान धृति, क्षमा, समदर्शिता, त्याग, स्नेह, आज्ञा पारायणता, संयमता, पराक्रमता, दिव्यता आदि गुणों को व्यक्ति को अपने जीवन में धारण करने की आवश्यकता है। अन्त में डा भूपेन्द्र ने समागत सभी विद्वानों और छात्रों का धन्यवाद व्यक्त किया। कार्यक्रम का सञ्चालन डा० अभिजित् ने किया।