बैक्टीरिया जीवन में जितना हानिकारक है उतना ही स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

दीपक मिश्रा

बैक्टीरिया जीवन में जितना हानिकारक है उतना ही स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। एक ओर यह जीवन में रोग उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार है वहीं दूसरी ओर इसको कल्चर करके औषधीय निर्माण में प्रयोग करके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक है। कोविड समय इसका सबसे प्रमाणिक उदाहरण है। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के वनस्पति एवं सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग के सभागार में स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान शताब्दी वर्ष के अवसर पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी बायोप्रोस्पेक्टिंगः भारतीय जातीय जीवविज्ञान की संपत्ति और वैदिक सूक्ष्मजीव विज्ञान विषय पर समविश्वविद्यालय की कुलपति प्रो0 प्रतिभा मेहता लूथरा ने अपने उद्गार व्यक्त किए। राष्ट्रीय संगोष्ठी के शुभारम्भ वैदिक मंत्रोच्चार तथा द्वीप प्रज्वलन द्वारा सम्पन्न हुआ। प्रो0 प्रतिभा मेहता लूथरा ने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में त्रयम्बकम् शब्द प्रकृति में वर्तमान, भूत तथा भविष्य तीनों स्थितियों में संतुलन स्थापित करके स्वस्थ जीवन के साथ स्वस्थ्य प्रकृति का निर्माण करता है। संसार में उत्तम कार्य करने से त्रयम्बकम का भाव फलीभूत होता है। आयोजन अध्यक्ष प्रो0 मुकेश कुमार ने एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के लक्ष्य तथा उद्देश्य पर प्रकाश डाला तथा अतिथियों का स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि एवं कुलसचिव प्रो0 सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि मनुष्य आज दया के अभाव में जीवन यापन कर रहा है। उन्होंने प्रकृति के दोहन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वृक्ष सभी रूपों में देवता के समान है। प्राण जगत से पूर्व प्रकृति जगत का सृजन इस सृष्टि का मूल है। यदि प्रकृति का दोहन इसी प्रकार चलता रहा तो मनुष्य इस सृष्टि का अन्तिम जीव होगा। व्यक्तिगत ऐशोआराम के लिए प्रकृति का संहार चिन्ता का विषय है। उन्होंने वैदिक ऋचाओं का वर्णन करते हुए सर्वेभ्योनमः, कृमिभ्योनमः, वनस्पतिभ्योनमः का संकल्प सभी को लेने का आह्वान किया।
संगोष्ठी में विषय प्रवर्तक एवं मुख्य वक्ता भारतीय ज्ञान प्रणाली के निदेशक एवं ए0के0एस0 विश्वविद्यालय सतना मध्य प्रदेश के प्रो0 रामलखन सिंह सिकारवार ने फूलों की बनावट, क्लोरोफिल तथा परागकण पर आकर्षित होने वाले कीटों के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में डा0 सुमित्र पाण्डेय, डा0 मेघा दुर्गपाल डा0 प्रदीप सैनी, डा0 संजय कुमार, डा0 संदीप कुमार ने भी विज्ञान की विभिन्न विधाओं पर शोध पत्रों के माध्यम से विचार व्यक्त किए। अतिथियों को अंगवस्त्र तथा औषधीय पौधे प्रदान कर सम्मानित किया गया। समविश्वविद्यालय अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक, डा0 सुहास ने कहा कि समविश्वविद्यालय में शोध की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर संसाधन एवं प्रोजेक्ट से जुड़ी नीतियों पर कार्य किया जा रहा है जिससे नवीन शोधार्थियों के लिए विकास के नए मार्ग प्रशस्त होंगे।
इस अवसर पर प्रो0 नवनीत, प्रो0 नमिता जोशी, प्रो0 राकेश भूटियानी, डॉ0 विरेन्द्र विर्क, डा0 विनित विश्नोई, डा0 हरीशचन्द्र, डा0 कार्तिकेय कुमार गुप्ता, डा0 चिरंजीब बनर्जी, डा0 आकांक्षा पाण्डेय, डा0 शिव कुमार चौहान, कुलभूषण शर्मा, मनोज कुमार, हेमन्त सिंह नेगी, विकास कुमार, नीरज कुमार, शुभम ठाकुर, हिमालया पंवार, आराधना, शिवम राय, आदि उपस्थित रहे। संगोष्ठी में एम0एस-सी तथा बी0एस-सी0 के छात्र/छात्राओं ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षकेत्तर कर्मचारी, मनोज रावत, अमरीश, गुरप्रीत, सोमेन्द्र रतुड़ी, अरूण कुमार, मुकेश का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन डा0 कल्पना सागर तथा धन्यवाद ज्ञापन डा0 संदीप कुमार द्वारा किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *