दीपक मिश्रा
हरिद्वार। “बात चाहें संस्कारों की हो अथवा संविधान के कर्तव्यों के अनुपालन की, यह हमारा अपना उत्तरदायित्व है, कि हम अपने संस्कारों व कर्तव्यों के अनुपालन की प्राचीन परम्पराओं को अपनी अगली पीढ़ी को बहुत सावधानीपूर्वक समप्रेषित करें।”
यह उद्गार हरिद्वार के मुख्य नगर विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्रा ने संस्कार भारती की हरिद्वार महानगर इकाई द्वारा सेक्टर-2 स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के सभागार में आयोजित ‘एक शाम भारतीय संविधान के नाम’ कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में अपने सम्बोधन में व्यक्त किए। उन्होंने अनेक उदाहरण देते हुए कहा कि “बीते कुछ वर्षों में निश्चित रूप से हमने अपने संस्कारों को अगली पीढ़ी तक आगे बढाने का कार्य बख़ूबी किया भी है।
देर शाम तक चले विचार एवं काव्य गोष्ठी के इस कार्यक्रम में बीस से भी अधिक वक्ताओं और कवियों ने भारतीय संविधान के 77 वर्ष की पूर्णता के अवसर पर इसके विभिन्न पहलुओं पर अपने वक्तव्यों व काव्य रचनाओं के द्वारा अपने विचार रखे। संस्था ने मुख्य अतिथि व सभी विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह व अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया, जबकि सभी कवियों को ‘संस्कार भारती काव्य श्री सम्मान’ तथा वक्ताओं को ‘संस्कार भारती साहित्य श्री सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
माँ भारती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण व पुष्पांजलि तथा वाणी वंदना तथा डाॅ० श्वेता शरण के संगीतमय ‘संस्कार भारती ध्येय गीत’ से प्रारम्भ हुए इस कार्यक्रम में भारतीय संविधान पर काव्य प्रस्तुतियों के क्रम में आशा साहनी ने ‘रख लो, इसका मान बचाकर, अपना संविधान है’, अमित कुमार गुप्ता ‘मीत’ ने ‘मान है सम्मान है भारत का संविधान है’ तो चेतना पथ के सम्पादक, कार्यक्रम के संयोजक, संस्था संरक्षक तथा कवियित्री अर्चना झा ‘सरित’ के साथ कार्यक्रम का संचालन कर रहे अरुण कुमार पाठक ने ‘संविधान वरदान नहीं मनमर्ज़ी बोते रहने का, आज़ादी के नाम पर मनमानी करते रहने का’ संविधान का महिमा मंडन किया।
रवीना राज ने ‘भीमराव की कलम संरचना बोल उठी, संविधान में समानता की गर्जना बोल उठी’ तथा मीनाक्षी चावला जी ने ’75 वर्ष पूर्ण हुए हैं भारतीय संविधान के, साक्षी है आज हम इस विश्व कीर्तिमान के’ के साथ भारतीय संविधान को नमन किया। वरिष्ठ गीतकार व पारिजात संस्था अध्यक्ष सुभाष मलिक ने व्यंग्य गीत ‘देख-देख संसद की भाषा संविधान शर्मिंदा’ तथा मनीषा सिंह देवेन्द्र मिश्र, राजेन्द्र कुमार, अर्चना झा ‘सरित’, डाॅ० अनुराधा पांडे, राजकुमारी राजेश्वरी आदि ने अपनी देशभक्ति रचनाएँ श्रोताओं की तालियाँ बटोरीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता महेश चन्द्र काला ने की। अतिथियों का स्वागत राकेश मालवीय ने किया, जबकि सन्तोष साहू ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
पवन राठौर ने भारतीय संविधान की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। डाॅ० नीता नय्यर ‘निष्ठा’ ने ‘भारतीय संविधान केवल कानूनी किताब नहीं हमारी संस्कृति का दस्तावेज भी है’, हिन्दी सेवक डाॅ० अशोक गिरि ने ‘भारतीय संविधान, भारतीय भाषाएँ और हिन्दी’ विषय पर अपने विचार व्यक्त किये, रुड़की से पधारी वीना सिंह ने बताया कि ‘संविधान के कौन से मूल्य आज भी हमारे प्रेरणा स्रोत हैं’ तो वृंदा वाणी ने समझाया कि ‘भारतीय संविधान में नागरिक कर्तव्य कितने ज़रूरी हैं। हिन्दी व संस्कृत के विद्वान डाॅ० सुगन्ध पांडे ने संविधान के विभिन्न पक्षों की ओर ध्यान आकर्षित किया तो रेखा सिंघल ने ‘भारतीय संविधान निर्माण में महिलाओं की भूमिका’ पर चर्चा की।
प्रान्तीय मातृ शक्ति संयोजिका ज्योति भट्ट ने इंदौर शिविर से प्राप्त प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए और मातृ शक्ति कलाकार बहनों के सर्वेक्षण पर सभी से सहयोग करने का आह्वान किया। श्री गंगासभा अध्यक्ष नितिन गौतम, समाज सेवी जगदीश लाल पाहवा व डॉ० विशाल गर्ग, संघ शाखा सम्पर्क प्रमुख रोहिताश्व कुँवर, डाॅ० अजय पाठक, पं० शिवनारायण शर्मा ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य लोकेन्द्र अन्थवाल, कवियित्री सुमन पंत व कंचन प्रभा गौतम, डॉ० तन्वी अग्रवाल, डॉ० नुपुर गुप्ता, वीरेंद्र अवस्थी, रीता अवस्थी, कमल सिंह सैनी, सुनील सैनी, रविन्द्र सोनी, नरेंद्र पुंडीर, डॉ नरेश मोहन, दीपक अग्रवाल, राकेश कुशवाहा, पुष्प लता हंस, पुष्पा अग्रवाल, बीना गुप्ता, वीणा कौल, रंजना शर्मा, निर्मला त्रिपाठी, श्रीजा त्रिपाठी, निशा कश्यप, रीना शर्मा, सरस्वती पुंडीर, प्रीति सिंह, जनक सहगल, लोकेंद्र चौधरी, मुनेश चंद शर्मा आदि सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं संस्था कार्यकर्ता उपस्थित रहे।