महाराणा प्रताप जैसा वीर यदि भारतवर्ष के इतिहास मे न होता तो भारत की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक स्थिति कुछ ओर ही होती।

दीपक मिश्रा 

महाराणा प्रताप जैसा वीर यदि भारतवर्ष के इतिहास मे न होता तो भारत की भौगोलिक एवं सांस्कृतिक स्थिति कुछ ओर ही होती। देश पर मर मिटने का जज्बा लेकर जब एक वीर घर से निकलता है, तब उसके सामने जिम्मेदारी की कडी से बंधी अनेक स्थितियॉ होती है। लेकिन सब कुछ छोड तथा आगे बढकर देश का नेतृत्व एवं मार्गदर्शन करने वाला महाराणा जैसा ही हो सकता है। गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ0 शिवकुमार चौहान ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 485 वीं जन्म जयन्ती पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, उत्तराखंड द्वारा आयोजित क्षत्रिय गौरव दिवस के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप मे यह बात कही। डॉ0 चौहान ने कहॉ कि मेवाड के इस वीर सपूत के जीवन का सबसे बडा युद्व 1576 मे हल्दी की घाटी का युद्व रहा। जिसमे अकबर जैसे आक्रान्ताओं ने महाराणा की वीरता एवं साहस के सामने घुटने टेक दिये। डॉ0 चौहान ने कहॉ कि क्षत्रिय वंश मे महाराणा जैसा वीर एवं साहसी कोई दूसरा होना काल्पनिक से परे है।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, उत्तराखंड के तत्वावधान मे आयोजित क्षत्रिय गौरव दिवस के अवसर पर आयोजित व्याख्यानमाला युवा पीढी के लिए प्रेरक एवं प्रासंगिक चरित्र महाराणा प्रताप विषय पर प्रान्तीय कार्यालय राजपूत धर्मशाला परिसर के सभागार मे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दीप प्रज्जवलन एवं वैदिक मत्रोच्चार के बीच महाराणा प्रताप का स्मरण करते हुए उपसिथत जनो ने उनके चित्र पर श्रद्वा-सुमन अर्पित किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रेम सिंह राणा ने कहॉ कि महाराणा ता सम्पूर्ण जीवन नैतिक मूल्यों तथा आदर्शो से भरा है, जिसका अनुसरण करके जीवन मे बहुत कुछ पाया जा सकता है। महेन्द्र सिंह नेगी ने कहॉ कि बल पराक्रम एवं साहस कर बेजोड उदाहरण महाराणा प्रताप को आज पूरा देश नमन कर रहा है। यह उनकी सामाजिक समरसता का सबसे बडा उदाहरण है। कार्यक्रम मे क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष शेखर राणा ने कहॉ कि राजपूताने की आन-बान एवं शान महाराणा जैसे वीरो से ही है, इसलिए महाराणा को देश का वीर सपूत कहॉ जाता है। सुशील पुंडीर ने कहॉ कि काव्यपाठ के रूप मे श्रद्वासुमन अर्पित करते हुऐ कहॉ कि चढ चेतक पर तलवार उठा, रखता था भूतल पानी को, राणा प्रताप सिर काट काट कर, करता था सफल जवानी को।। राजपूत धर्मशाला मे आयोजित व्याख्यानमाला मे यशपाल सिंह, मदनपाल सिंह, जे0ई0 सतपाल सिंह, डॉ0 बिजेन्द्र सिंह चौहान, कृष्णपाल सिंह, प्रदीप पुंडीर, पार्षद नागेन्द्र सिंह राणा, रामगोपाल सिंह, कपिल सिंह, हदयेश तोमर, रतन सिंह, शेखर राणा, सुमित चौहान, पराक्रम सिंह, यश पुंडीर, गौरव राणा आदि उपस्थित रहे। महाराणा प्रताप आज भी अमर एवं जीवन्त चरित्र के रूप मे नई पीढी का मार्गदर्शन कर रहे है। इसी संकल्प एवं अभिव्यक्ति के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। अन्त मे महाराणा के जय-जयकार से सभागार गुंज उठा।

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