दीपक मिश्रा
*चेतावनी : नहर पटरी पर खड़े वृक्षों को बचाने के लिए शुरू करेंगे “चिपको आंदोलन” – विजयपाल बघेल*
*घोषणा : मुख्य सचिव से योजना निरस्तीकरण हेतु मांग की, मांग न मानने पर जाएंगे कोर्ट – ग्रीन मैन ऑफ इंडिया*
हरिद्वार, 2 दिसम्बर। हरिद्वार में अमरापुर घाट से जटवाड़ा पुल तक अपर गंग नहर के दोनों किनारों पर खड़े हजारों वृक्षों पर प्रशासन द्वारा आरी चलाने की तैयारी को “चिपको आंदोलन” का ग्रहण लगने वाला है। मुख्य सचिव उत्तराखंड के सम्मुख ‘श्वेत पत्र’ के माध्यम से नहर पटरी जो संरक्षित वन भूमि के रूप में अधिघोषित है उस पर भारत सरकार की पूर्व अनुमति के कोई गैर वानिकी कार्य अवैधानिक होने का कानूनी और पर्यावरणीय पक्ष रखते हुए तत्काल प्रभाव से प्रकृति विरोधी योजना के निरस्तीकरण करने की मांग ट्री ट्रस्ट ऑफ इंडिया की तरफ से की गई है। नहर पटरी पर खड़े हजारों वृक्षों पर कुल्हाड़ी चलाने का कुकृत्य करने का प्रयास किया गया तो पेड़ों से चिपककर उनकी रक्षा करने के लिए चिपको आंदोलन संचालित किया जाएगा और हठ धार्मिता की तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा। उक्त जानकारी ट्री ट्रस्ट ऑफ इंडिया के चेयरमैन ग्रीन मैन विजयपाल बघेल द्वारा अपने बयान में दी। उन्होंने अमरापुर घाट से जटवाड़ा पुल तक अपर गंग नहर की पटरी पर लहलहाते हजारों विशाल दरख़्तों की रक्षा करने के लिए जरूरी हुआ तो चिपको आंदोलन संचालित की चेतावनी देते हुए न्यायालय की शरण में जाने की घोषणा की।
ग्रीन मैन ऑफ इंडिया ने पेड़ कटान जैसी पर्यावरण विरोधी गतिविधि में संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कराए जाने का ऐलान किया, अपर गंग नहर के दोनों किनारों की भूमि संरक्षित वन भूमि की श्रेणी में अधिसूचित है जिस पर खड़े पेड़ों को काटना या वन भूमि पर कोई गैर वानिकी कार्य करना संज्ञेय वन अपराध की श्रेणी में आता है। बघेल ने बताया कि संरक्षित वन भूमि पर किसी भी तरह का विनाशकारी हस्तक्षेप पूर्णतः निषेध है, नहर पटरी पर तो वृक्ष पातन के साथ अवैधानिक रूप से स्थाई निर्माण कर उच्चतम न्यायालय के आदेश का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने एनजीटी के वन भूमि पर पेड़ कटने जैसे कई गैर वानिकी कार्य रोकने संबंधी जारी किए विभिन्न आदेशों की धज्जियां उड़ाए जाने पर भी चिता जताई है। सारे वैधानिक और पर्यावरणीय तथ्यों को साक्ष्य के साथ संलग्न करके मुख्य सचिव उत्तराखंड को ‘श्वेत पत्र’ के माध्यम से चेताया गया है, सौंपे ‘श्वेत पत्र’ में अपर गंग नहर के दोनों किनारों पर खड़े हजारों वृक्षों को बचाने एवं जारी निर्माण कार्य रूपी अतिक्रमण करने वाली योजना को निरस्त कराने हेतु उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्यवाही करने की मांग की है।
बघेल ने धार्मिक हरिद्वार नगरी में होने जा रहे अधार्मिक कार्य करने वाली एजेंसियां और विभागों को भी सचेत किया है कि नहर पटरी पर जारी गैर वानिकी कार्य करने से परहेज करें, मुख्य सचिव को प्रेषित ‘श्वेत पत्र’ रजिस्ट्रार उच्चतम न्यायालय, चेयरमैन एन जी टी, अध्यक्ष केंद्रीय अधिकारिता समिति के संज्ञान में देकर इसकी प्रति मुख्यमंत्री उत्तराखंड, प्रधान प्रमुख वन संरक्षक/विभागाध्यक्ष, वन विभाग, मेलाधिकारी हरिद्वार कुंभ, जिलाधिकारी हरिद्वार, डी एफ ओ हरिद्वार, अधिशासी अभियंता उत्तराखंड सिंचाई विभाग, अधिशासी अभियंता उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग, उपाध्यक्ष हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण एवं नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम को सौंपा गया ताकि सभी संबंधित को किसी चूक का सामना न करना पड़े।