दीपक मिश्रा
हरिद्वार। वन क्षेत्रों की निगरानी और गश्त व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए हरिद्वार वन प्रभाग में शुक्रवार को रानीपुर सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सहयोग से आयोजित कार्यशाला में फील्ड कर्मचारियों को एमएसटीआरआईपीईएस ऐप के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। वन प्रभाव की 50 संवेदनशील बीटों के लिए वन कर्मियों को 50 मोबाइल फोन भी वितरित किए गए। वन आरक्षी और वन दरोगाओं को ऐप के प्रयोग, उसकी उपयोगिता और वन क्षेत्रों में गश्त के दौरान इसके प्रभावी इस्तेमाल की विस्तृत जानकारी दी गई। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया और टाइगर सेल एनटीसीए के विशेषज्ञों द्वारा दिए गए प्रशिक्षण में ऐप के माध्यम से वन्यजीवों की निगरानी, गश्त की ट्रैकिंग, वन्यजीव अपराध नियंत्रण, पारिस्थितिकी डाटा संग्रहण और विश्लेषण जैसे पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि यह एक उन्नत प्रणाली है, जो वन विभाग को फील्ड स्तर पर काम की रियल टाइम मॉनिटरिंग और डेटा प्रबंधन में मदद करती है। इस तकनीक के जरिए वन क्षेत्रों में हो रही गतिविधियों पर प्रभावी नजर रखी जा सकेगी और वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी। कहा कि माध्यम से गश्त व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। फील्ड स्टाफ को तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है, जिससे वन्यजीव संरक्षण और अपराध नियंत्रण में बेहतर परिणाम मिलेंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ फील्ड में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर भी चर्चा की।
कार्यशाला में वरिष्ठ कॉर्डिनेटर डॉ. आई.पी. बोपन्ना, डब्ल्यू डब्ल्यूएफ इंडिया के कंसल्टेंट विक्रम सिंह तोमर, फील्ड असिस्टेंट राजेंद्र बिष्ट, शिवम, एनटीसीए के रिसोर्स पर्सन देवरंजन और आशीष प्रसाद सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।