दीपक मिश्रा
शिक्षा कार्यो मे अनुसंधान से रचनात्मक बदलाव लाना सम्भव है। ऊअनुसंधान कार्यो मे परीक्षण (टेस्ट) विशिष्ट गुणों से युक्त एक महत्वपूर्ण उपकरण की भूमिका का निर्वहन करता है। अनुसंधान कार्यो की उपयोगिता आम-जनमानस के जीवन को सरल एवं प्रभावी बनाने की दिशा मे आवश्यक है। गुरूकुल कांगडी समविश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ0 शिवकुमार चौहान ने मॉ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय, सहारनपुर द्वारा प्री-पी0एच0डी0 शोधार्थियों के लिए संचालित कोर्स-वर्क मे विशेषज्ञ के रूप मे आयोजित व्याख्यान मे यह बात कही। डॉ0 शिवकुमार चौहान ने कहॉ कि शोध कार्यो के लिए निपुण युवाओं को तैयार करने की दिशा मे कोर्स-वर्क एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह शोधार्थी को अनुसंधान कार्यो का रोड मैप तैयार करने तथा इसके निर्माण मे आने वाली कठिनाईयों को दूर करने के लिए परिपक्व बनाता है। मनोवैज्ञानिक परीक्षण शिक्षा से जुडे अनुसंधान एवं सर्वे कार्यो मे महत्वपूर्ण रोल निभाते है। मनोवैज्ञानिक परीक्षण व्यक्ति के व्यवहार को प्रदर्शित करने की एक व्यवस्थित प्रक्रिया है। जिसे संख्यात्मक पैमाने अथवा श्रेणी प्रणाली की सहायता से वर्णित किया जाता है। डॉ0 चौहान ने कहॉ कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण लिखित, दृश्य एवं मौखिक परीक्षण के माध्यम से संचालित किये जाते है और जिसमे अधिकतर परीक्षणों का उपयोग लोगों के बीच समय के साथ होने वाले अन्तरों के मापन के लिए किया जाता है।
पाठयक्रम के संयोजक एवं कार्यक्रम का संचालन कर रहे शिक्षक डॉ0 सहदेव सिंह मान ने भी प्री-पी0एच0डी0 शोधार्थियों के लिए कोर्स वर्क को महत्वपूर्ण बताया। हाईब्रिड माध्यम से चल रहे इस कार्यक्रम मे डॉ0 अब्दुल अजीज खान, सत्यवीर सिंह, युवराज राणा, बल सिंह, मनजीत सिंह, सतपाल सिंह, शरद पंवार, सुनील कुमार, विकास कुमार आदि उपस्थित रहे। संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ0 सहदेव सिंह मान द्वारा किया गया।