हरकी पैड़ी पर श्रीमद् भागवत कथा

दीपक मिश्रा 
हरिद्वार, 20 मई। श्रीगंगा सभा के तत्वावधान में हरकी पैड़ी के मालवीय द्वीप पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन की कथा श्रवण कराते हुए कथाव्यास मन्माध्व गौडेश्वर वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी महाराज ने कहा कि शुकदेव जी का भागवत में प्रवेश केवल एक ऋषि का आगमन नहीं, बल्कि स्वयं भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अवतरण है। जिसने राजा परीक्षित को ही नहीं, समस्त मानव समाज को मोक्ष का मार्ग प्रदान किया। उन्होंने कहा कि जब राजा परीक्षित को श्रापवश सात दिन में मृत्यु का ज्ञान हुआ, तब उन्होंने गंगा तट पर समस्त ऋषि-मुनियों की सभा में जीवन के अंतिम समय में मोक्ष का उपाय पूछा। उसी समय युवा तपस्वी शुकदेव वहां पहुंचे। उनका तेज और दिव्यता देखकर सभी ऋषि सम्मान में खडे हो गए। राजा परीक्षित ने उन्हें प्रणाम कर प्रश्न किया कि मृत्यु समीप होने पर मनुष्य को क्या करना चाहिए। तब शुकदेव ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत की अमृतमयी कथा सुनाई। श्रीगंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, महामंत्री तन्मय वशिष्ठ सहित सभी पदाधिकारियों और अमृतसर के अग्रवाल परिवार ने व्यासपीठ का पूजन किया। श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने सनातन संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कथा व्यास का आभार जताया। उन्होने कहा कि भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि लोगों को प्रेम, सद्भाव और संस्कारों का संदेश भी दे रही है। उन्होने अग्रवाल परिवार सहित सभी के लिए मां गंगा से मंगलकामना की। कथा श्रवण करने वालों में श्रीगंगा सभा उपाध्यक्ष हनुमंत झा, स्वागत मंत्री सिद्वार्थ चक्रपाणि, समाज कल्याण मंत्री विकास प्रधान, उज्जवल पण्डित, प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान के अलावा श्रीगंगा सभा के सभी पदाधिकारी व श्रद्धालु शामिल रहे।

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