बायोप्रोस्पेक्टिंग: भारतीय जातीय जीवविज्ञान की संपत्ति और वैदिक सूक्ष्मजीव विज्ञान आज के विषय की प्राथमिक आवश्यकता

दीपक मिश्रा 

बायोप्रोस्पेक्टिंग: भारतीय जातीय जीवविज्ञान की संपत्ति और वैदिक सूक्ष्मजीव विज्ञान आज के विषय की प्राथमिक आवश्यकता है। सामान्य जनमानस को इस और प्रेरित करने तथा इससे होने वाले फायदों को उद्देश्य बनाकर गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के वनस्पति एवं सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन दिनांक 21 जुलाई दिन मंगलवार को विभागीय सभागार में आयोजित की जा रही है। संगोष्ठी के अध्यक्ष प्रो0 मुकेश कुमार ने बताया कि संगोष्ठी में देशभर से जाने-माने शिक्षाविद व शोधछात्र तथा विज्ञान की विभिन्न विधाओं से जुड़े हुए वैज्ञानिक तथा विद्वान ऑनलाइन तथा ऑफलाइन माध्यम से प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करेंगे। समविश्वविद्यालय की कुलपति प्रो0 प्रतिभा मेहता लूथरा की अध्यक्षता में होने वाले इस आयोजन में वैदिक माईक्रोबॉयलॉजी, औषधीय पादप, स्वास्थ्य के परम्परागत पहलू तथा जैव संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।
कुलसचिव प्रो0 सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से छात्र तथा छात्राओं को नवीन वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी प्राप्त होती है। उन्होंने इस संगोष्ठी के सफल आयोजन की अग्रिम शुभकामनाएं दी। आयोजन को सुचारू रूप से सम्पन्न करने के लिए समन्वयक का दायित्व प्रो0 नवनीत, डा0 वरिन्दर विर्क, डा0 सुहाय, डा0 संदीप कुमार, डा0 कार्तिकेय कुमार गुप्ता, डा0 हरिशचन्द्र, डा0 विनित विश्नोई, डा0 चिरंजीव बनर्जी, डा0 कल्पना सागर को दायित्व प्रदान किया गया है।

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