अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्र – छात्राओं को करेंगे सम्मानित

दीपक मिश्रा

उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी संस्कृत शोधछात्रों, अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्र – छात्राओं को करेंगे सम्मानित हरिद्वार— उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी द्वारा प्रदेश की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के प्रचार-प्रसार तथा संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत संस्कृत छात्र – छात्राओं के व्यक्तित्व विकास व उच्चशिक्षा संस्थानों से संस्कृत विषय में शोधकार्य कर रहे शोधछात्रों में रूचि उत्पन्न करने की दृष्टि से प्रदेश के माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में प्रथमा से उत्तरमध्यमा कक्षा तक (कक्षा-8 से 12 ) अध्ययनरत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 52 छात्र व 48 छात्रा कुल-100 शिक्षार्थियों को चार लाख उनसठ हजार छः सौ रूपये की छात्रवृत्ति सहित प्रदेश के उच्चशिक्षण संस्थानों में पंजीकृत संस्कृत विषय के कुल 17 शोधछात्रों को नेट परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्ति के आधार पर वार्षिक छात्रवृत्ति छः लाख अस्सी हजार रूपये प्रदान की जायेगी।
अकादमी के सचिव शिवप्रसाद खाली ने बताया कि राज्यस्तरीय माडर्न पुस्तकालय, ननूरखेड़ा देहरादून में बुधवार को प्रातः 10 बजे से कार्यक्रम आयोजिन किया जायेगा जिसमें प्रदेश के माननीय संस्कृत शिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत द्वारा प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत अनुसूचित जाति जनजाति छात्र – छात्राओं को छात्रवृत्ति एवं उच्चशिक्षण संस्थानों में संस्कृत शोधछात्र सम्मान राशि प्रदान की जायेगी । अकादमी द्वारा प्रदेश के संस्कृत विषय में नेट उत्तीर्ण शोधछात्रों से शोधछात्रवृत्ति हेतु विज्ञापन में निर्धारित नियमावलि के तहत आवेदन मांगे गये थे जिसके फलस्वरूप अनेकों शोधछात्रों द्वारा आवेदन किया गया था आवेदन प्राप्ति की निर्धारित तिथि के उपरान्त शोधछात्रवृत्ति चयन समिति द्वारा 17 शोधछात्रों के आवेदन स्वीकार किये गये। समिति द्वारा चयनित छात्रों एवं प्रदेश के समस्त संस्कृत विद्यालयों में अध्ययनरत अनुसूचित जाति जनजाति के छात्र – छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी ।
अकादमी के कोषाध्यक्ष सत्येन्द्रप्रसाद डवराल ने बताय कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से संस्कृत शिक्षा प्राप्त कर रहे प्रत्येक छात्र-छात्रा को समान रूप से सक्षम बनाये जाने हेतु प्रयास किया जा सकता है संस्कृत भाषा किसी आयु, वर्ग एवं जाति विशेष की भाषा न होकर एक सार्वजनिक संस्कारों की भाषा है। आज के समय में प्रत्येक वर्ग को संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन एवं संस्कृत भाषा में निहित ज्ञान – विज्ञान को जनसामान्य तक पहुंचाने का
संकल्प लेने की आवश्यकता है।

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