ईद-उल-अजहा पर नमाज अता कर मांगी मुल्क के अमनो चैन और तरक्की दुआएं नमाज के दौरान उठी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

दीपक मिश्रा 
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से ही लगेगा विवादों पर विराम-मौलाना आरिफ
हरिद्वार, 28 मई। ईद उल अजहा की नमाज ज्वालापुर स्थित ईदगाह सहित ग्रामीण व शहरी क्षेत्र की मस्जिदों में अता की गई। बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों ने नमाज अता कर मुल्क के अमनो चैन की दुआएं मांगी। ईदगाह में मौलाना वाहिद ने नमाज अता करायी। नमाज के बाद कुर्बानी पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि कुर्बानी समर्पण और अटूट विश्वास का संदेश देती है। खुदा ताल्हा की आजमाइश में हजरत इब्राहिम खरे उतरे और अपने पुत्र हजरत इस्माइल को भी कुर्बान करने से भी पीछे नहीं हटे। मौलाना आरिफ ने कहा कि ईद उल अज़हा एकता भाईचारे का संदेश देने वाला पर्व है। देश में विभिन्न धर्म समुदाय द्वारा मनाए जाने वाले पर्व भारत की संस्कृति के प्रतीक हैं। आपसी भाईचारे और प्रेम से ही मुल्क की तरक्की होगी। उन्होंने सरकार से गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की अपील करते हुए कहा कि गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने से राष्ट्रीय स्तर पर गौ संरक्षण का मार्ग प्रशस्त होगा। कानून बनाकर गाय बेचने और काटने वाले दोनों पर सख्त सजा का प्रावधान किया जाए। जिससे आए दिन होने वाले विवादों पर विराम लग सकेगा। ईदगाह कमेटी के सदर जमशेद खान व बाबर खान ने ईद उल अज़हा की बधाई देते हुए कहा कि हर्षाेल्लास व उत्साह के साथ त्योहार मनाएं। हिंदू मुस्लिम एकता का परिचय दें। कुर्बानी करते समय सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जानवरों के अवशेष इधर-उधर ना फेंके। पार्षद अहसान अंसारी ने कहा कि सभी धर्म समुदायों का सम्मान करते हुए त्योहार की खुशियों को एक दूसरे से साझा करें। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एकता से ही देश को मजबूती मिलती है। उन्होंने पुलिस प्रशासन एवं नगर निगम द्वारा दिए गए सहयोग का भी आभार जताया। ईदगाह कमेटी के उपाध्यक्ष सज्जाद गौड एवं हाजी मुकर्रम अली ने कहा कि मिलजुल कर बकरा ईद को मनाते हुए सौहार्द एकता भाईचारे का संदेश दें। उन्होंने शासन प्रशासन का भी आभार जताया। नमाज अता करने के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने कुर्बानी में हिस्सा लिया। नमाज के दौरान पुलिस द्वारा ईदगाह एवं विभिन्न मस्जिदों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। इस अवसर पर बाबर खान, अब्बास अब्बासी, नाजिम कुरैशी, पप्पन कुरैशी, शाहनवाज अब्बासी, नौशाद मंसूरी, गुलाम साबिर, शहनवाज सिद्दीकी, शाहनवाज सलमानी, अयूब खान, रफी खान, जैनुल अंसारी, आकिब मंसूरी, मौलाना वसीम कारी, इदरीश, शौकीन अब्बासी, सलीम अब्बासी, सलीम गौड, अहसान अंसारी आदि मौजूद रहे।

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