मनवांछित फल की प्राप्ति कराना ही भागवत कथा का हेतु है-स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती

दीपक मिश्रा 
हरिद्वार, 27 जुलाई। श्रीगीता विज्ञान आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती महाराज ने कहा है कि जिसका जिस पर सच्चा स्नेह होता है। वह उसे अवश्य मिलता है और मनवांछित फल की प्राप्ति कराना ही भागवत कथा का हेतु है। राजा गार्डन स्थित श्रीहनुमान मंदिर सत्संग भवन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मणी के विवाह का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि माता रुक्मणी मां लक्ष्मी की अवतार थी। इसलिए उनका विवाह तो भगवान श्रीकृष्ण के साथ होना ही था। लेकिन रुक्मणी का भाई अपनी बहन का रिश्ता कहीं अन्यत्र करना चाहता था। माता रुक्मणी के आवाहन पर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं प्रकट हुए और रुक्मणी का वरण किया। भागवत कथा व्यक्ति को भगवतसत्ता के समीप पहुंचाकर उसकी सभी मनवांछित इच्छाओं की पूर्ति करती है। भगवान के विवाहोत्सव का महत्व समझाते हुए कथा व्यास ने कहा कि इस आयोजन में सम्मिलित होने का सौभाग्य उसी को प्राप्त होता है। जिस पर गुरु की कृपा होती है। सभी भक्तों ने भगवान के ग्रहस्थ स्वरूप की आरती उतारकर विश्व कल्याण की कामना की।

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