नरेश बंसल नेेेे सदन में आपदा प्रबंधन संशोधन विधेयक का समर्थन किया

दीपक मिश्रा 

 

भाजपा राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष एवं सांसद राज्य सभा श्री नरेश बंसल नेेेे सदन में आपदा प्रबंधन संशोधन विधेयक का समर्थन किया। इस विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए डा0 नरेश बंसल ने सदन में अपने अभिभाषण में कहा कि आपदा से सुरक्षा सशक्त राष्ट्र की पहचान है। ये संशोधन विधेयक देश की आपदा प्रबंधन प्रणाली को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
डा0 नरेश बंसल ने कहा कि उत्तराखण्ड एक आपदा संवेदनशील राज्य है। जहां भूकम्प, भूस्खलन, बाढ़, जंगल की आग और बादल फटने जैसे प्राकृतिक आपदाएं लगातार आती रहती हैं उन्होंने कहा कि क्योंकि मैं उत्तराखण्ड से आता हूं इसलिए इस प्रकार की आपदाओं से निरंतर देखा है।
उन्होंने सदन में 1991 के उत्तरकाशी के भूकम्प के बारे में बताते हुए कहा कि वहां एक अवसाद व निराशा का वातावरण था सरकार की ओर से ठोस आपदा प्रबंधन की कमी थी जिस वजह से सरकार की ओर से राहत एवं पुनर्वास कार्य में बहुत दिक्कत थी।
डा0 नरेश बंसल ने सदन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रशंसा करते हुए कहा कि संघ की ओर से उत्तरांचल देवीय आपदा पीडित सहायता समिति जिसके स्वयं डा0 बंसल 20 वर्ष तक संस्थापक महामंत्री रहे ने आपदा में दबे लोगों को निकालने से लेकर भटवाडी ब्लाक के 170 गांवों को गोद लेने तक सभी राहत एवं पुनर्वास के कार्य किये जिससे उस क्षेत्र का पुनर्विकास हुआ।
डा0 बंसल ने कहा कि भाजपा सरकार में 2005 में आपदा प्रबंधन कानून बना तथा 2016 के संशोधन में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण। डा0 बंसल ने कहा कि 23 सितंबर, 2019 को न्यूयाॅर्क में संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्यवाही शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री द्वारा आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना संगठन का शुभारंभ किया गया था जिसमें अब तक 42 देशों व अन्य 7 संगठनों ने इसकी सदस्यता ली है।
डा0 बंसल ने सदन को बताया कि विभिन्न प्रकार की आपदाएं चक्रवात के समय समन और मोचन के लिए एक वेब आधारित डायनमिक कम्पोजिट रिस्ट एक्ट लेस और डिसिजन सपोर्ट सिस्टम टूल विकसित किया गया है जिससे चक्रवातों से होने वाले नुकसान को रोकने में सफलता मिली है। एनआरएससी द्वारा बाढ़ संवेदनशील प्रदेशों में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कार्य हो रहे हैं। यह मोदी जी के नेतृत्व में कुशल आपदा प्रबंधन को दर्शाता है।
डा0 बंसल ने कहा कि भारतीय हिमालय क्षेत्र में 28000 हिमनद हैं जिसका जिलेवार एक व्यापक डाटा सेट तैयार किया गया है। भारत का मौसम विभाग आज प्रभावी संभावी संघ व राज्य क्षेत्रों के लिए नियमित मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी बुलेटिन जारी करता है।
डा0 नरेश बंसल ने कहा कि उत्तराखण्ड समेत समस्त देश में जलवायु परिवर्तन से बढ़ती आपदाओं के कारण सशक्त आपदा प्रबंधन की आवश्यकता पहले से अधिक हो गई है जिसे यह आपदा प्रबंधन संशोधन विधेयक पूरा करता है।
डा0 बंसल ने कहा कि उत्तराखण्ड हिमालय क्षेत्र में स्थित है यहां भूकम्प का खतरा हमेशा बना रहता है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले आपदा प्रबंधन की केंद्र में बैठी सरकारें समय पर सुध नहीं लेती थी। उन्हांेने 2013 की केदारनाथ आपदा का जिकर करते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार पर कटाक्ष किया कि उस समय की कांगे्रस सरकार ने 08 दिनों तक इस भीषण आपदा की सुध नहीं ली।
डा0 नरेश बंसल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे के नेतृृृत्व में तत्परता से किये गये राहत कार्य की सराहना एवं भूरी-भूूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने उसमें भी रोड़़े अटकाने का कार्य किया। ना राहत सामग्री पहुंचने दी ना मोदी जी को केदारनाथ जाने दिया।
डा0 बंसल ने मोदी जी द्वारा भेजी गई राहत सामग्री की तारीफ करते हुए कहा कि मोदी किट से मशहूर आपदा से प्रभावित लोगों के लिए थी जिसमें आवश्यकता की सारी सामग्री मौजूद थी।
डा0 बंसल ने सदन को बताया कि उस समय आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी जी जो बाबा केदारनाथ व उत्तराखण्ड के पुर्ननिर्माण का संकल्प लेकर वहां से आए थे। 2014 से उस पर निरंतर कार्य हो रहा है। आज बाबा केदारनाथ धाम के साथ श्री बद्रीनाथ धाम का भी सौंदर्यीकरण हुआ है। चारधाम यात्रा को बारहमासा किया जा रहा है, आॅल वेदर रोड़ सरकारी द्वारा बनायी जा रही है। आज रेल भी पहाड चढने लग गई हैै।
डा0 बंसल ने बताया कि 2014 के बाद जितनी भी आपदाएं आई जैसे सिलक्यारा सुरंग हादसा हाल ही मे माणा में हुआ हिमस्खलन वह विश्व को चकित करने वाली घटनाएं थी लेकिन आदरणीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के कुशल नेतृत्व एवं प्रधानमंत्री मोदी जी के ओजपूर्ण मार्गदर्शन में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी एवं स्थानीय प्रशासन आदि के सहयोग से आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण का जो कार्य हुआ उससे दुर्घटना व आपदा से होने वाले नुकसान में भारी कमी आई है।
डा0 बंसल ने इस संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इसमें आपदा की परिभाषा का विस्तार किया गया है। संघ और राज्य सरकार की भूमिकाएं और स्पष्ट की गई हैं जिससे राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी आएगी। इसमें ग्लेशियर पिघलने, जलवायु परिवर्तन, और जैविक आपदाओं को भी शामिल किया गया है। स्थानीय प्रशासन एवं समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना है।
उत्तराखण्ड समेत देश में सैटेलाईट इमेजिंग एआई आधारित पूर्वानुमान तकनीक को बढ़ावा देने की योजना है। रेस्क्यू, और राहत टीमों को अधिक सशक्त करने की योजना है। स्थानीय स्तर पर आपदा कोष की वृद्धि जिससे छोटे कस्बों में तुरन्त राहत प्रदान की जा सकेगी की योजना है, इसमें जैविक आपदाओं एवं आधुनिक खतरों को कम करने एवं नई तकनीक और उपयों का समावेशन कर डाटा एनलिटिक्स और एआई के उपयोग को बढावा देने की योजना है। जिससे आपदा के समय होने वाली जान-माल की क्षति को कम किया जा सकेगा एवं रेस्क्यू और राहत में आसानी होगा।

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