दीपक मिश्रा
हरिद्वार-16 अप्रैल 2025 शिक्षक की कुशलता वर्तमान तथा भाविष्य के बीच सेतु की भॉति काम करती है। एक शिक्षक नई पीढी के लिए मार्गदर्शक तथा नये युग का परिचायक होता है। गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय के शारीरिक शिक्षा एवं खेल विभाग मे प्रशिक्षु बी0पी0एड0 छात्रों की अध्यापन कुशलता को बढाने के लिए विशेष संवाद आयोजित किया गया। प्रशिक्षु बी0पी0एड0 छात्रों की अध्यापन कुशलता को बढाने के लिए विशेष संवाद मे डॉ0 शिवकुमार चौहान के निर्देशन मे छात्रों ने शारीरिक शिक्षा की विभिन्न विधाओं तथा क्षेत्रों से जुडी जानकारियों को संवाद के माध्यम से प्रस्तुत किया। संवाद सत्र मे एसोसिएट प्रोफेसर डॉ0 शिवकुमार चौहान ने कहॉ कि एक कर्मशील, निष्ठावान एवं संस्कारित शिक्षक ही नई पीढी मे शिक्षा के आदर्श एवं मूल्यपरक विचारों के प्रतिरोपण का शिल्पकार हो सकता है। शिक्षा तथा दीक्षा मे अन्तर को समझाते हुये डॉ0 चौहान ने कहॉ कि दीक्षा प्राप्त करने के लिए पात्रता होना अनिवार्य नही है, परन्तु शिक्षा प्राप्त करने वाले के लिए पात्रता के साथ चयन की प्रक्रिया से गुजरा भी जरूरी है। लगन, निष्ठा तथा समर्पण का भाव दीक्षा-शिक्षा दोनो के लिए आवश्यक है। जबकि चयन की प्रक्रिया आवश्यक नही है। प्रशिक्षु छात्रों द्वारा मनोविज्ञान, खेल कुशलता, शारीरिक स्वास्थ्य, शोध की उपयोगिता, फिटनेस के मापदण्ड तथा खेलों की प्राथमिक एवं विशिष्ट जानकारियों के माध्यम से संवाद मे प्रतिभाग किया। यह संवाद प्रशिक्षुओं के लिए कक्षाओं मे विषय को रोचक एवं प्रभावी बनाने के साथ व्यवसायिक कुशलता के साथ कक्षाओं मे विभिन्न मानसिक स्थिति के छात्रों को विषय की मुख्य धारा से जोडने मे निपुणता प्रदान करता है। संवाद मे प्रियरंजन, देवराज रॉय, हितिक शर्मा, प्रणव, विशाल निगम, अमन रावत, दीपक जैमिनी, शंशांक, सुचित सोनारे, अमित गिरी, बंटी सोनारे, अमन रावत, मोहित गोसाई आदि ने भाग लिया।