राम का जीवन मर्यादा, त्याग, तप तथा अनुशासन का सबसे प्रेरक उदाहरण है।

दीपक मिश्रा 

हरिद्वार-27 मार्च, 2026 राम का जीवन मर्यादा, त्याग, तप तथा अनुशासन का सबसे प्रेरक उदाहरण है। व्यवहारिक एवं सामाजिक जीवन मे राममर्यादित आचरण का अनुपालन वैज्ञानिक दृष्टि से आज भी प्रांसंिगक है। गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के योग एवं शारीरिक शिक्षा संकाय के एसोसिएयट प्रोफेसर एवं विश्वविद्यालय जनसम्पर्क अधिकारी डॉ0 शिवकुमार चौहान ने कहॉ कि रामनवमी का पावन अवसर प्रत्येक व्यक्ति को राम के सम्पूर्ण जीवन को आदर्श मानकर कम से कम नौ आदतों को जीवन धारण करने का संकल्प ले। सहारनपुर की सामाजिक संस्था अभ्युदय (रजि0) द्वारा दिनांक 26.03.2026 को रामनवमी के अवसर पर सहारनपुर के एक बैकंट हाल मे राम मर्यादित जीवन की सार्थकता एवं उपयोगिता विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया। विषय प्रवर्तक के रूप मे डॉ0 शिवकुमार चौहान ने कहॉ कि आज की आधुनिक एवं वैज्ञानिकता परक सोच मे मूल्यों एवं संस्कारों के स्वरूप मे बदलाव हुआ है, लेकिन मूल भाव उन मूल्यों के साथ ही सार्थक है। रामनवमी के अवसर पर पहले संकल्प मे अपने पिता को प्रतिदिन प्रणाम करना आरम्भ करे। प्रायः देखा जा रहा है कि आज अंग्रेजियत के कारण यह मूल्य धीरे-धीरे हासिये पर पहुॅचता जा रहा है। दूसरे संकल्प मे माता के द्वारा दी गई बात भले ही व्यवहारिक दृष्टि से सही न होने पर भी सीखनी चाहिए। तीसरा संकल्प जिसने राम के जीवन को सबसे अधिक प्रभावित किया भ्रात्तव प्रेम है। यह मूल्य सामाजिक समरसता एवं प्रेम की अद्भुत सीमा से परे है। परिवारों के टूटने एवं कलंह के बढने का कारण मूल रूप से इसकी कमी है। चौथा संकल्प पत्नी के सम्मान एवं उसका परिवार एवं पति के प्रति प्रेम की पराकष्ठा को सिद्व करता है। पॉचवा संकल्प आश्रितों की सेवा एवं अनके प्रति निष्चल भक्ति का संदेश देता है। छठा संकल्प मित्रता और विश्वास का आदर्श स्थापन है। जिसमे राम ने शोषित सुग्रीव और शरणागत विभीषण को गले सलाकर मित्रता का सम्मान एवं विश्वास का आदर्श स्थापित किया। सामाजिक एकता के लिए यह सबसे अधिक आवश्यक बनता जा रहा है। सातवां संकल्प अधर्म को त्यागने एवं धर्म की स्थापना के लिए सर्वदा उद्त एवं आगे रहना चाहिए। आठवा संकल्प न्यायप्रिय बनना है। प्रेम एवं एकता के विस्तार के लिए यह सबसे मूल्य परक कर्तव्य है। नौंवा संकल्प वचनबद्वता- विषम परिस्थिति मे भी सत्य का साथ कभी नही छोडना। इन नौ संकल्पों के आधार पर राम मर्यादा पुरूषोतम कहलाये। आज रामनवमी के पुनीत अवसर पर प्रत्येक मानव को जीवन मे इन नौं संकल्पों कों अवश्य धारण करना चाहिए तथा जीवन मे उच्च एवं आदर्श मूल्यों के प्रभाव तथा स्थापन के लिए तत्पर रहने के लिऐ आगे आना चाहिऐ। डॉ0 चौहान ने कहा कि सामाजिक व्यवस्था मे तेजी से हो रहे बदलाव एवं जीवन मे अनुशासन तथा मूल्यों के पतन को रोकने के लिए सभी को सकारात्मक प्रयास एवं मौलित चिन्तन करने से ही यह सम्भव हो सकता है। ऑन-लाईन आयोजित इस कार्यक्रम मे साहित्यकार, हिन्दी जगत के प्रतिभावन विद्वान, शोध एवं गुणता प्रकोष्ठ के अधिकारी एवं योग तथा शारीरिक शिक्षा के विशेषज्ञ एवं प्राध्यापकगण, समाजशास्त्री एवं अन्य विधाओं के छात्र, छात्रायें एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो0 सीमा श्रीवास्तव तथा डॉ0 स्वाति धीमान ने किया। कार्यक्रम अध्यक्ष शिक्षाविद्व रामेश्वर प्रसाद गौंड ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया। दीप-प्रज्जवलन से कार्यशाला आरम्भ तथा शान्तिपाठ के साथ सम्पन्न हुई।

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