सङ्गोष्ठी का आयोजन कराया गया।

दीपक मिश्रा

 

उत्तराखण्ड सरकार के निर्देशानुसार,उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी के द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता में कर्म का महत्त्व एवं श्रीमद्भगवद् गीता में त्याग का रहस्य इन दो विषयों पर जनपदस्तरीय आनलाइन सङ्गोष्ठी का आयोजन कराया गया।
ज्ञात हो कि उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी (उत्तराखण्ड सरकार) के द्वारा संस्कृत के प्रचार-प्रसार, संरक्षण-संवर्धन एवं श्रीमद्भगवद्गीता में निहित ज्ञान-विज्ञान,भक्ति-उपासना एवं कर्मविषयक विचार को जन- जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से गीता जयन्ती के उपलक्ष्य में, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी से पौषशुक्ल एकादशी (23 दिसम्बर 2023 से 21 जनवरी 2024 )तक आनलाइन “”श्रीमद्भगवद्गीताजयन्ती मास महोत्सव 2023-24″” का आयोजन प्रदेश भर के 13 जनपदों में किया जा रहा है,जिसके अन्तर्गत प्रत्येक जनपद में आनलाइन व्याख्यानमाला/संगोष्ठी का आयोजन किया जाना निर्धारित किया गया है।
श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय संस्कृति,ज्ञान-विज्ञान एवं आदर्श चिन्तन शैली एवं उपासना का सर्वमान्य ग्रन्थरत्न है।श्रीमद्भगवद्गीता में ज्ञान-विज्ञान,भक्ति,उपासना,कर्म आत्मिक-चिन्तन,उचित-अनुचित विचार,अन्तश्चेतना का जागरण,आत्मवत् सर्वभूतेषु यः पश्यति स पण्डितः,सर्वभूतहिते रताः,न दैन्यं न पलायनम् जैसी महनीय उदात्त प्रेरणाएं विद्यमान हैं।श्रीमद्भगवद्गीता का विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है तथा देश व विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों में गीता का पठन-पाठन, स्वाध्याय,चिन्तन एवं अनुसंधान का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। अतः श्रीमद्भगवद् गीता के इस अनुपम ज्ञान को जनसामान्य तक पहुँचाने हेतु हरिद्वार जनपद में भी दिनाङ्क 12 जनवरी को इस आनलाइन सङ्गोष्ठी का आयोजन किया गया।
अध्यक्ष के रूप में सङ्गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए,केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर श्रीधर मिश्र ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार का यह प्रयास अत्यन्त श्लाघनीय है।हमारे सनातन धर्म में असंख्य धार्मिक ग्रन्थ हैं किन्तु उनमें गीता एक रत्न है।सम्पूर्ण धार्मिक वाङ्मय का सार इस ग्रन्थरत्न में समाहित है।अतः इसमें निहित शिक्षा को अपने जीवन में अपनाकर कोई भी व्यक्ति अपना कल्याण कर सकता है।अत एव कहा भी जाता है-गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यैः शास्त्रविस्तरैः।
या स्वयं पद्मनाभस्य मुखपद्माद्विनिःसृता।।
कार्यक्रम को अपना पावन सान्निध्य प्रदान करते हुए श्रीभगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार के पूर्व प्राचार्य डाॅ.भोला झा ने कहा कि सम्पूर्ण गीता में कर्म को प्रधान बताया गया है।अतः मानव को निरन्तर सत्कर्म करते ही रहना चाहिए।इसी से वह अपने जीवन में सुख प्राप्त कर सकता है।
मुख्य वक्ता के रूप में सभा को सम्बोधित करते हुए श्रीलालबहादुरकेन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली, के व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राम सलाही द्विवेदी ने कहा कि कर्म भी दो प्रकार के होते हैं।1-सकाम 2-निष्काम। इनमें भी यदि मानव निष्काम कर्म को महत्त्व देता है तो इससे उसका न केवल ऐहलौकिक जीवन ही सफल होता है अपितु पारलौकिक जीवन भी सफल होता है।एवं निष्काम कर्म करने से व्यक्ति का अन्तःकरण अत्यन्त पवित्र हो जाता है, जिससे उसको अन्ततोगत्वा भगवत्प्राप्ति भी हो जाती है।जबकि सकाम कर्म केवल इस संसार की ही आवश्यकताओं की पूर्ति करा सकता है। सहवक्ता के रूप में सभा को सम्बोधित करते हुए साधना सदन आश्रम हरिद्वार के आचार्य श्रीप्रज्ञानानन्द पुरि महाराज ने कहा कि आजकल का जनसामान्य त्याग के वास्तविक मर्म को नहीं समझ पा रहा है,उसके लिये पलायनवाद ही त्याग है।जबकि वास्तविक त्याग वही है जो किसी भी वस्तु का सन्तोषपूर्वक छोड़कर अपनाया गया हो। ऐसा त्याग ही मानव के आध्यात्मिक जीवन का सच्चा साथी बनता है। सभा को सारस्वतातिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के वेदवेदाङ्गसङ्कायाध्यक्ष, प्रोफेसर शैलेश कुमार तिवारी ने कहा कि कर्म की गति अत्यन्त सूक्ष्म होती है।मनुष्य जैसा भी शुभ अथवा अशुभ कर्म करता है,उसका वैसा ही परिणाम उसको अवश्य ही भोगना पढता है।अतः प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन को अत्यन्त सावधानी के साथ जीना चाहिए। कार्यक्रम को मुख्यातिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए संस्कृत भारती उत्तराखण्ड के प्रान्त सङ्गठनमन्त्री श्रीगौरव शास्त्री ने कहा कि गीता हमें जीवन जीने का सही मार्ग प्रदान करती है। अतः हमें गीता में निहित जीवनमूल्यों को अपने जीवन में अवश्य ही उतारना चाहिए।
उक्त कार्यक्रम में सहभागिता हेतु पतञ्जलि विश्वविद्यालय,देव संस्कृति विश्वविद्यालय,उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय,गुरुकुल काङ्गडी विश्वविद्यालय, सरस्वती विद्या मन्दिर मायापुर,ज्वालापुर इण्टर कालेज,श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय,ऋषिकुल संस्कृत महाविद्यालय,निर्धन निकेतन संस्कृत महाविद्यालय आदि 24 शैक्षणिक संस्थाओं को आमंत्रित किया गया था एवं उक्त संस्थाओं के लगभग 200 प्रतिभागियों ने सङ्गोष्ठी में प्रतिभाग किया।राज्य संयोजक डाॅ.हरीश गुरुरानी ने सभी अतिथि महानुभावों का स्वागत किया।कार्यक्रम के अन्त में जनपद सह संयोजक अभिषेक परगाॅई ने समागत सभी अतिथिमहानुभावों का धन्यवाद ज्ञापित किया। सभा का सञ्चालन जनपद संयोजक डाॅ.दीपक कुमार कोठारी के द्वारा किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *